1. बजट पर चर्चा - Page 20

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बजट पर चर्चा *

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : अध्यक्ष महोदय! बजट पर काफी समय से बहस चल रही है और मैं महसूस करता हूं कि जो कुछ भी इस संबंध में कहा जा सकता था, वह पहले ही कहा जा चुका है। इसलिए मेरे जैसे नए सदस्य के लिए चुप रहना ही उचित होता। लेकिन मुझे लगता है कि अब भी एक ऐसा दृष्टिकोण है, जिसे सदन के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है, और चूंकि मैं उस दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता हूं, अतः उस दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करना मैं अपना कर्त्तव्य समझता हूं।

अध्यक्ष महोदय! जब कोई व्यक्ति बजट की आलोचना करता है, तो वह शुरू से ही अपने आपको लाचार महसूस करता है, क्योंकि प्रभावी आलोचना का दायरा बहुत सीमित होता है। बजट में कुल अनुमानित व्यय लगभग 36 प्रतिशत है। प्रेसिडेंसी का कुल अनुमानित राजस्व पन्द्रह करोड़ पचास लाख रुपए है और इसमें से नौ करोड़ पचास लाख रुपए के कर कार्यपालिका द्वारा परिषद की स्वीकृति के बिना लगाए गए हैं। मेरा मतलब भू-राजस्व और उत्पाद शुल्क से है। इसलिए व्यय और राजस्व, दोनों को ध्यान में रखकर विचार किया जाए, तो मैं समझता हूं कि यह कहना उचित होगा कि आलोचना का क्षेत्र बहुत सीमित है, क्योंकि परिषद तो केवल 64 प्रतिशत व्यय और 40 प्रतिशत राजस्व पर ही विचार कर सकती है। लेकिन, अध्यक्ष महोदय! वस्तुस्थिति को सही परिप्रेक्ष्य में देखते हुए मैं अपनी क्षमता के अनुसार टिप्पणी करना चाहता हूं।

सबसे पहले मैं बजट के राजस्व के संदर्भ में माननीय वित्त सदस्य के दृष्टिकोण से और फिर करदाताओं के दृष्टिकोण से विचार करना चाहता हूं। माननीय वित्त सदस्य मेरे इस कथन से सहमत होंगे कि एक अच्छी कर-प्रणाली की प्रथम और सबसे अनिवार्य आवश्यकता यह है कि उसे विश्वसनीय होना चाहिए। यह बात महत्त्वपूर्ण नहीं है कि कर-प्रणाली से अधिक अथवा कम राजस्व की प्राप्ति होती है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि राजस्व से जो भी प्राप्ति होनी है, उसकी मात्रा निश्चित होनी चाहिए।

* बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 19, पृ. 164-68, 24 फरवरी 1927

डॉ. अम्बेडकर ने बंबई विधान परिषद के नामांकित सदस्य के रूप में शुक्रवार, 18 जनवरी 1927 को शपथ ली थी।