महाविद्यालयों को लेकर करनी है, तब प्रत्येक महाविद्यालय केवल एक विषय पढ़ाने तक ही अपने को सीमित रखे।
प्रश्न 31-33 : प्रश्न 36-39 के उत्तर देखें।
प्रश्न 34 : शिक्षा का प्रसार विश्वविद्यालय का एक विशिष्ट कार्य होना चाहिए। किंतु इस लक्ष्य को तब तक प्राप्त नहीं किया जा सकता, जब तक कि विश्वविद्यालय शिक्षा के माध्यम के रूप में देशी भाषा को नहीं अपनाता है, जो कि वर्तमान अवस्था में दूर की बात है।
प्रश्न 35 : विश्वविद्यालय के शैक्षिक मामलों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होना चाहिए। ये पूर्ण रूप से संकायों को सौंप दिए जाने चाहिएं। परंतु विश्वविद्यालय के विधायी एवं प्रशासनिक मामलों पर सरकार का कुछ नियंत्रण होना चाहिए। इसे सरकार को विश्वविद्यालय की ‘कोर्ट’ एवं सीनेट के मनोनयन द्वारा प्राप्त करना चाहिए।
प्रश्न 41-44 : मुझे इन प्रश्नों को नवगठित संकायों के लिए छोड़ देना चाहिए। मेरे विचार में आनर्स पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को हल्की शिक्षा ही प्रदान करता है।
प्रश्न 45-46 : मैं शिक्षा माध्यम के रूप में देशी भाषा के प्रयोग के संबंध में एक सशक्त सकारात्मक दृष्टिकोण रखता हूं। लेकिन मैं ऐसा अनुभव करता हूं कि इस समस्या का समाधान तब तक नहीं ढूंढा जा सकता है, जब तक कि भारतीय जनता यह निश्चित न कर ले कि सामान्य बोलचाल के लिए, वह किस देशी भाषा को चुनती है।
प्रश्न 52 : मैं समझता हूं कि पिछड़े वर्गों और विशेषकर दलितों के मध्य विश्वविद्यालय को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।
प्रश्नावली के संबंध में अपने उत्तरों को समाप्त करने से पूर्व एक अच्छे पुस्तकालय के निर्माण के प्रति समिति द्वारा दिखाई गई अत्यधिक उदासीनता के लिए मैं आश्चर्य व्यक्त करना चाहूंगा। मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि किसी प्रथम श्रेणी पुस्तकालय की संबद्धता के बिना कोई विश्वविद्यालय कैसे कार्य कर सकता है।