अनुच्छेद 303 - Page 111

96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

1 माननीय श्री के. संथानमः अनुच्छेद 303 क्या मैं यह जान सकता हूँ कि क्या कोई व्यक्ति जो अपनी रियासत के किसी प्रांत में विलय के कारण उस रियासत को खो चुका है उसका शासक बना रहेगा या वह उत्तराधिकारी हो चुका है?

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः पूरी कठिनाई यह है, बल्कि यह जटिल चीज है। यह चकरा देने वाली बात है। मैं यह मानता हूँ कि जो व्यक्ति अपना रियासत खो चुका है, वह (ढढ) में दी गई परिभाषा तथा अनुच्छेद 367-क के प्रयोजनार्थ भी शासक बना रहेगा।

माननीय श्री के. संथानमः उसका पुत्र भी क्यों नहीं शासक बना रहेगा?

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः हो सकता है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह कहना चाहूँगा कि शासक की परिभाषा केवल प्रिवीपर्स का भुगतान करने के सीमित उद्देश्य से ही दी गई है। इसका अन्य संदर्भ बिल्कुल ही नहीं है।

माननीय श्री के. संथानमः मेरा यह कहना है कि क्या इसका अर्थ यह हो सकता है कि एक ही समय में दो व्यक्ति इन भत्तों को पाने के हकदार होंगे। मैं यह सुनिश्चित कराना चाहता हूँ कि एक समय में ही एक व्यक्ति नियम पत्र के अधीन भुगतान पाने का हकदार होगा।

श्री सभापतिः मैं समझता हूँ कि यह इसमें संरक्षित है क्योंकि शासक के रूप में मान्यताप्राप्त व्यक्ति ही भुगतान प्राप्त करने का हकदार होगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह मान्यता देने संबधी उपबंधों के द्वारा शासित होगा। मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति दो या तीन या चार व्यक्तियों को मान्यता नहीं देने जा रहे हैं। इस अभिव्यक्ति का उपयोग जानबूझकर किया गया है, ताकि राष्ट्रपति को शक्ति प्रदान की जा सके।

माननीय श्री के. संथानमः उसे शासक या उत्तराधिकारी की संज्ञा दी जा सकती है।

श्री सभापतिः श्री संथानम, मेरे विचार से यह बिल्कुल स्पष्ट है मैं नहीं समझता कि आगे और चर्चा जरूरी है। मैं इस पर मत लूँगा।

{ अनुच्छेद 303 के खंड (1) के उपखंड (ढढ) को प्रतिस्थपित करने वाला श्री टी.टी. कृष्णमाचारी का संशोधन स्वीकृत हुआ। }

2 श्री सभापतिः फिर हम अनुसूची को लेते हैं।

12 सी.ए.डी. खंड 10, 14 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 282वही, पृष्ठ 286-288