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विवरणः (1) उपखंड (क) इस खंड के एक बिक्री या खरीद माल वास्तव में
खपत के उद्देश्य के लिए इस तरह की बिक्री या खरीद का एक परिणाम के रूप में दिया गया था, जिससे राज्य में खपत हो, इस तथ्य के बावजूद किसी अन्य राज्य में पारित माल की खरीद-बिक्री से सामान्य कानून के तहत माल की खरीद बिक्री शामिल नहीं है।
(2) संसद द्वारा कानून के तहत दिए प्रावधानों को छोड़कर राज्य का कोई भी कानून किसी भी माल घर की खरीद या बिक्री पर कोई भी कर लागू या लागू करने को अधिकृत नहीं होगा, जो कि अंतर्राजीय खरीद बिक्री (व्यापार) में आता हो।
राष्ट्रपति यह आदेश (निर्देश) जारी कर सकता है कि माल की खरीद बिक्री पर कोई भी कर जो कि किसी भी राज्य सरकार द्वारा वसूला जाता था संविधान के लागू होने से पहले, लेकिन अब संविधान के लागू होने के बाद यह इन प्रावधानों के विपरीत है, लेकिन यह 31 मार्च, 1951 तक इसी तरह वसूले जाएंगे।
(3) राज्य विधायिंका द्वारा बनाया गया कोई भी कानून किसी भी कर के लागू या लागू करने को अधिकृत है। माल के खरीद-बिक्री पर वे संसद द्वारा घोषित किए गए हैं जो कि व्यापार समुदाय के जीवन के लिए जरूरी है उनका प्रभाव तब तक रहेगा जब तक यह राष्ट्रपति द्वारा विचार के लिए आरक्षित हो और उनकी स्वीकृति पा ली हो।
उस अनुच्छेद 280 के बाद निम्नलिखित अनुच्छेद डाला गया है
(280-A(1) : यदि राष्ट्रपति सहमत हो कि एक ऐसी स्थिति आ गई
है जिसमें किसी भी भू-भाग में उठी वित्तीय स्थिरता
या भारत की स्थिति किसी भू-भाग में खतरे में हो,
तो वह इस संबंध में घोषणा जारी कर सकता हैः
(1) अधिनियम (2) के प्रावधान जो संविधान के
अनुच्छेद 275 इस संबंध में अधिनियम (1) में लागू
है जो कि इमरजेंसी की घोषणा कर सकते हैं जैसा
कि अनुच्छेद 275 के अधिनियम (1) में कहा गया
है।