2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रिवी काउंसिल क्षेत्राधिकार विधेयक को
समाप्त किया जाना
श्री सभापतिः आज पहले कार्य विधेयक को लिया जाना है। डा. अम्बेडकर।
माननीय डा. बी.बार. अम्बेडकर (बंबई - जनरल)ः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव
करता हूँ।
‘‘कि 14 सितम्बर, 1949 को भारतीय अपीलों और याचिकाओं के संबंध में परिषद में पुनः स्थापित महामहिम के क्षेत्रधिकार को समाप्त किए जाने वाले विधेयक पर सभा द्वारा विचार किया जाए।’’
मैं कुछेक शब्द ही कहना चाहूँगा और सदन को यह बताना चाहूँगा कि यह विध्ेयक जरूरी क्यों हो गया और विधेयक में क्या किए जाने का प्रस्ताव है। दो परिस्थितियों के कारण विधेयक लाए जाने की आवश्यकता पड़ी। एक तो प्रस्तावित अनुच्छेद 308 के खंड (3) में अंतर्विष्ट उपबंध का होना है। यह अनुच्छेद 308 परवर्ती उपबंधों में मौजूद है। अनुच्छेद 308 के खण्ड (3) में यह उपबंध किया गया है किः
‘‘इस संविधान के प्रारंभ से पहले ही अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट किसी राज्य में प्रिवी काउंसिल के रूप में कार्यरत प्राधिकारी की उस राज्य के भीतर किसी न्याय के किसी निर्णय, छिक्री या आदेश की या उसके संबंध में अपीलों और याचिकाओं को ग्रहण करने या निपटाने की अधिकारिता समाप्त हो जाएगी और उक्त प्राधिकारी के समक्ष ऐसे प्रारंभ पर लंबित सभी अपीलें और अन्य कार्यवाहियाँ उच्चतम न्यायालय को अंतरित कर दी जाएँगी और उसके द्वारा निपटाई जाएँगी जिसका अर्थ है कि तिथि को संविधान प्रभावी होगा, उस तिथि से प्रिवी काउंसिल का क्षेत्राधिकार पूरी तरह समाप्त हो जायेगा।’’
दूसरी परिस्थिति जिसके कारण यह विधेयक लाना जरूरी हो गया है, यह है कि यह प्रस्ताव किया गया है कि यह संविधान 26 जनवरी, 1950 के आस-पास लागू होना चाहिए। इन दो परिस्थितियों का प्रभाव यह है कि 26 जनवरी, 1950 को संविघान के लागू होने की तिथि मान लिए जाने के बाद प्रिवी काउंसिल को कोई अपील या
* सी.ए.डी खंड 9, 17 सितंबर, 1945 पृष्ठ 1589-1590