150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कई माननीय सदस्यः प्रतिदिन पाँच घंटे।
प्रो. एन.जी. रंगा (मद्रासः जनरल)ः अपरा“न 2ः30 से अपरा“न 6ः30 तक, ताकि हमें केवल एक बार आना पड़े।
श्री के.एम. मुंशीः मैं 15 मिनट का सुझाव देता हूँ और एक दिन 5 घंटे बैठक होनी चाहिए, ताक सदस्यों को इस सत्र और अगले सत्र के बीच कुछ और दिन मिल जाएँ।
कई माननीय सदस्यः आधा घंटा।
श्री सभापतिः समझौते के तौर पर प्रत्येक वक्ता के लिए समय सीमा 26 मिनट की होगी।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हम लोग अभी सिर्फ यह निर्णय ले सकते हैं कि क्या हमें कल बैठक करनी चाहिए। साथ ही यह वांछनीय है कि बोलने के इच्छुक सदस्यों से अपने नाम भेजने को कह सकते हैं। सामान्य बहस में बोलने वाले वक्ताओं की संख्या का पता चलने पर आपके लिए यह निर्धारित करना संभव हो पाएगा कि क्या एक दिन में दो सत्र बुलाए जाएँ और प्रत्येक वक्ता को कितना समय दिया जाए? इस समय कोई नहीं जानता कि कितने सदस्य बोलना चाहते हैं। यदि वक्ताओं की संख्या बहुत अधिक नहीं होगी तो प्रत्येक सदस्य के लिए बोलन े की समय सीमा बढ़ाना तथा प्रतिदिन एक ही सत्र बुलाना संभव हो सकता है। इसलिए, मेरा सुझाव है कि आप केवल कल के लिए बैठक निर्धारित करेंगे और इस बीच सदस्यों से अपने नाम देने को कहें, ताकि आपके पास वक्ताओं की सूची मौजूद हो और फिर हम अन्य मुद्दों के साथ-साथ प्रत्येक वक्ता के लिए समय सीमा और प्रतिदिन सत्रों की संख्या एक या दो रखी जाए, आदि के संबंध में निर्णय ले सकते हैं।
श्री सभापतिः मैं समझता हूँ कि यह एक व्यावहारिक सुझाव है।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः महोदय, मेरा यह कहना है कि कल हम अन्य दिनों की तरह म.पू. दस बजे से म.प. 1 एक बजे तक तथा म.प. तीन से म.प. पाँच बजे तक बैठें।
श्री सभापतिः वर्तमान में मेरा निर्णय है कि हम कल अन्य दिनों की तरह म.पू. दस बजे समवेत होंगे और मैं उम्मीद करता हूँ कि सदस्यगण जो बहस में भाग लेने के इच्छुक हैं अपना नाम आज तक भेज देंगे। उस सूचना से मुझे बैठक के घंटे आदि के बारे में निर्णय लेने में मदद मिलेगी मैं यह बता सकता हूँ कि सदस्यों के लिए
खुला विकल्प है कि यद्यपि इन्होंने अपना नाम बहस के लिए दे भी रखा हो तो भी वह बहस में भाग नहीं लेना चाहें, तो उसमें भाग ले सकें।
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सभा कल म.पू. 10 बजे तक के लिए स्थगित हुई। तत्पश्चात् सभा बृहस्पतिवार, 17 नवंबर, 1949 के म.पू. दस बजे तक के लिए स्थिगित हुई।