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अथवा नहीं तो उत्तर का निर्धारण भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 290 में अंतर्ष्टि संदर्भों के अनुरूप किया जा सकता है।
यदि मेरे मित्र सिधवा भारत सरकार अधिनियम की धारा 290 पर गौर करें, तो वह पाएँगे कि गवर्नर जनरल के लिए न तो प्रांतीय विधानसभा और न ही भारतीय विधानमंडल के विचार जानना जरूरी है। उसे सिर्फ आदेश द्वारा प्रभावित होने वाली किसी प्रांत की सरंकार का विचार जानने की जरूरत है। इसलिए जहाँ तक धारा 29 के लागू होने के संबंध है,-और यही एकमात्र धारा है जिसकी अभी और 25 जनवरी के बीच प्रांतों के मामले में सहायता ली जा सकती है- इसमें प्रांतीय विधानमंडल तथा भारतीय विधानमंडल दोनों को धारा 290 के अधीन गवर्नर जनरल द्वारा किसी प्रकार के परामर्श करने के दायरे से बिल्कुल अलग रखा गया है। इ सलिए अपने मित्र श्री सिधवा के प्रति सभी शुभकामनाओं के साथ यही कहूँगा कि उनकी इच्छा को पूरा करवाना संभव नहीं होगा। इसलिए उन्हें धारा 290 में मौजूद उपबंधों से संतुष्ट हो जाना चाहिए। महोदय, मैं नहीं समझता कि किसी अनुच्छेद के मामले में उत्तर देने की जरूरत है। मैं इसलिए आशा के साथ अपनी बात समाप्त करता हूँ कि सभा प्रारुप समिति द्वारा प्रस्तावित संशोधनों को स्वीकार करेगी। (हँसी)।
श्री सभापतिः अब मैं उन संशोधनों में से प्रत्येक पर मत लूँगा। सभी सदस्य देख चुके हैं कि बहुत सारे संशोधन हैं जो सदस्यों ने या फिर प्रारुप समिति ने प्रस्तुत किए हैं। हो सकता है कि सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किए गए कुछ संशोधन प्रारुप समिति को स्वीकार्य हो और यह भी हो सकता है कि कुछ सदस्य अपने द्वारा संशोधनों को वापस लेना चाहते हों।
[ प्रारुप समिति के ही कुल 95 संशोधन स्वीकृत हुए, 66 संशोधन अस्वीकृत हुए और 36 संशोधन वापस लिए गए। ]
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1 श्री सभापतिः हम अगले दिन के लिए सभा को स्थगित करने के पूर्व समय-सारणी के संबंध में कुछ करना चाहेंगे कि हम क्या कार्यवाही कराने का प्रस्ताव करते हैं। मैं समझता हूँ कि हम दोपहर बाद बैठक नहीं करने जा रहे हैं। मैं यह जानना चाहता हूँ कि कितने सदस्य बोलना चाहेंगे ताकि मैं उनके क्रम और समय निर्धारित कर सकूँ। अगले शनिवार को बैठक किए जाने के संबंध में मेरे इस समय निर्णय कर पाना संभव नहीं है। मैं इस पर शुक्रवार को निर्णय करूँगा कि हम शनिवार को बैठक करें अथवा नहीं। प्रतिदिन के सत्र के संबंध में सदस्यों की क्या इच्छा है।
1 सी एडी, अधिकारिक प्रतिवेदन खंड X 15 नवंबर 1949, पृष्ठ 606