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भारत का संविधान सभा कंस्टीटयूशन हॉल, नई दिल्ली में म.पु. दस बजे समवेत हुईः श्री सभापति (माननीय डॉ. राजेन्द्र प्रसाद) पीठासीन थे। (बृहस्पतिवार, 17 नवंबर 1949)।
1 श्री सभापतिः डॉ. अम्बेडकर अब हम संविधान का तीसरा पाठन करेंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बंबई जनरल)ः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि सभा द्वारा तैयार किए गए संविधान को पारित किया जाए।’’
हँसी।
श्री महावीर त्यागी (संयुक्त प्रांत जनरल)ः बधाई हो।
श्री एच.वी. कामथ (सी.पी. और बरार जनरल)ः डॉ. अम्बेडकर को कृपया बोलने दें।
माननीय श्री एन.वी. गाडगिल (बंबईः जनरल)ः इस प्रश्न पर मत लिया जाए (हँसी)।
श्री महावीर त्यागीः हम जो संविधान पारित करने जा रहे हैं, उसके बारे में डा. अम्बेडकर का क्या रोल है?
श्री सभापतिः मेरे विचार से हमें अब अपना कार्य शरु करना चाहिए। डॉ. अम्बेडकर ने यह प्रस्ताव किया है कि सभा द्वारा तैयार किए गए संविधान को पारित किया जाए। प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी। कल हम लोग इस तीसरे पठन के लिए चर्चा करने हेतु समय के बारे में बात कर रहे थे। और मैंने सदस्यों से अपने नाम देने का अनुरोध किया था। कल शाम तक मुझे 71 सदस्यों के नाम मिले थे जो बोलना चाहते हैं और कुछ अतिरिक्त नाम आज सुबह प्राप्त हुए हैं। फिर भी मुझे लगता है कि यदि हम प्रत्येक सदस्य को बीस मिनट का समय देते हैं, और हम इस सप्ताह तीन दिन और अगले सप्ताह पाँच दिन बैठैं, तो हमारे पास चौबीस घंटे हो जाएँगे और बहत्तर वक्ताओं को हम बीस-बीस मिनट का समय दे पाएँगे। जहाँ तक समय का संबंध है, मैं समझता हूँ कि हम बोलने के इच्छुक प्रत्येक सदस्य को अवसर प्रदान करके समय का सही प्रबंध कर सकते हैं। अतः हमारे लिए देर तक बैठना जरूरी नहीं है।
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1 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड XI 17 नवंबर 1949, पृष्ठ 607-608