154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री एच.वी. कामथ ः हमें चार घंटे बैठना चाहिए।
श्री सभापति ः इस दस से हमें चार घंटे नहीं बैठना पड़ेगा।
श्री एच.वी. कामथ ः यदि हम चार घंटे बैठेंगे, तो हम शुक्रवार की बजाय अगले बृहस्पतिवार को ही सत्र समाप्त कर पाएँगे। यदि हम सत्र जल्दी समाप्त कर लेते हैं, तो विधानमंडल के सत्र से पूर्व हमारे पास लंबे समय का अंतराल रहेगा।
डॉ. पी.एस. देशमुख (सी.पी. और बरार जनरल) ः कुछ माननीय सदस्य यहाँ बाद में आ सकते हैं और अपना काम दे सकते हैं।
श्री सभापतिः वे लोग आ सकते हैं। हमारे पास कुछ और भी कार्य है। आज और कल किसी भी रूप में इस सप्ताह के अंत तक हम यदि केवल तीन घंटे तक बैठें और यदि जरूरी हुआ तथा हमें लगेगा कि पर्याप्त रूप से कार्य नहीं हो पाया है_ तो हमारे पास अगले सप्ताह दुसरा सत्र भी है।
श्री एल. कृष्णमाचारी भारती (मद्रासः जनरल)ः क्या 10 बजे से एक बजे तक बैठेंगे?
श्री सभापतिः जी हाँ।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः हम लोग बिल्कुल सहमत हैं।
श्री सभापतिः अब, मैं नहीं जानता कि मैं सदस्यों को किस क्रम से बुलाऊँ। मैं समझता हूँ कि सामान्य प्रथा का पालन करना चाहिए। यदि सदस्य अपने स्थान पर
खड़े हों तो मैं उनमें से एक-एक का नाम चयन करता जाऊँगा।
श्री एच.जे. खांडेकर (सी.पी. और बरारः जनरल) ः उन्हें अकारादि क्रम चाहिए।
श्री सभापतिः मैं समझता हूँ कि वह एक यांत्रिक प्रक्रिया हो जाएगी। मैं सामान्य प्रथा का ही पालन करता हूँ और मुझे आशा है कि उसमें कोई कठिनाई नहीं होगी। श्री मुन्नीस्वामी पिल्लै (प्रारुप के अनुसार बुलाना समिति, इसके अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर की सेवाओं की प्रशंसा तथा संविधान के महत्व का वर्णन करने वाले सदस्यों के भाषणों के चयनित अंश यहाँ दिए गए हैं। संपादक)
श्री वी.आई. मुन्नीस्वामी पिल्लै (मद्रासः जनरल)ः सभापति महोदय मैं मेरे माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए इस महती सभा में बोलने के लिए खड़ा हुआ हॅूँ....