192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
यह कुछ उपबंध किए जाने की आवश्यकता को स्पष्टतया दर्शाता है जिसमें यह आश्वासन दिया जाए कि ऐसा अन्याय और आगे नहीं होगा तथा समाप्त करने के लिए त्वरित कार्रवाई की जाएगी। मैं भारत सरकार तथा प्रांतीय सरकारों से हरिजनों के कल्याण के लिए और उन्हें भर्ती करने के लिए उनकी जनसंख्या के अनुसार सेवाओं में भर्ती करने हेतु अनुच्छेद 338 को लागू किया जाए....
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1 श्री राम चंद्र गुप्त (संयुक्त प्रांतः जनरल)ः महोदय, मुझे इस प्रस्ताव पर बोलने के लिए कुछ मिनट का अवसर प्रदान किया गया है, उसके लिए आपका काफी आभारी हूँ। वर्तमान संविधान जिसे इस देश के इतिहास में महान स्वतंत्रता का चार्टर के नाम से जाना जाएगा, जिसे हमारे लोगों में आज लंबे और अंतहीन संघर्ष करके तथा काफी पीड़ा झेलकर प्राप्त किया है। इसलिए हमें इस पर गर्व करने का पूरा अधिकार है और मुझे इसमें कोई संशय नहीं है कि भावी पीढ़ी 26 जनवरी, 1950 को पवित्र दिन के रूप में याद रखेगी जब इस देश में वास्तविक आजादी की सुबह हुई थी।
इस संविधान में लगभग 400 खंड हैं जो 3 वर्षों के लंबे परिश्रम, सुविचारित तरीके से किए गए विचार-विमर्श और बहुत सारे समझौते किए जाने के परिमाणस्वरूप समाने आ पाया है। इसमें कोई संशय नहीं कि देश उन सभी व्यक्तियों का आभार सामने आ पाया है। इसमें कोई संशय नहीं कि देश उन सभी व्यक्तियों का आभार मानेगा जिन्होंने इस संविधान को बनाने में अपना योगदान दिया है। प्रारुप महोदय, आप दोनों में यह दिखा दिया है कि आप लोग दूसरों का सहूलियत प्रदान करने के मामले कितने उदार हो सकते हैं।
संविधान, आज जिस रुप में है, इस सभा के माननीय सदस्यों द्वारा प्रस्तुत हजारों संशोधनों पर हुई गर्मागर्म चर्चा तथा लंबी बहस का परिणाम है वस्तुततः संविधान में एक भी ऐसा शब्द नहीं है जिस पर किसी न किसी सदस्य का ध्यान नहीं गया हो। मैं तो आपको विस्तार से यह भी बता सकता हूँ कि हमारे मित्र श्री नजरूद्दीन अहमद बड़े सतर्क रहे हैं तथा उन्होंने वाक्य चि“नों अर्थात कॉमा विसर्ग, पूर्ण विराम तक का ध्यान रखा है। यह सच है कि प्रत्येक मामले पर आम-सहमति नहीं प्राप्त की जा सकती, लेकिन इसमें कोई संशय नहीं है कि सभा द्वारा पारित सभी खंडों को बहुत बड़े बहुमत का हमेशा समर्थन रहा है। लगभग सभी महत्वपूर्ण विवादस्पद प्रश्नों पर पूरी तरह से विचार करने हेतु कई-कई बार स्थगित रखा गया तथा जहाँ तक संभव हो पाया उन पर आम सहमति प्राप्त की गई।
1 सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 1 24 नवंबर 1949, पृष्ठ 919-920