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मैं एक शब्द में यह कह सकता हूँ कि वर्तमान संविधान लेने-देने की भावना के परिणामस्वरूप किए गए सुखद समझौते के आधार पर तैयार किया है और इस सभा के सदस्यों में इस मामले में काफी उदारता दिखाई है। ऐसी परिस्थितियों में आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि सभी सदस्यों के अंदर संविधान में शामिल किए गए सभी मामलों पर एक समान संतुष्टि होगी। यह विभिन्न वक्ताओं द्वारा संविधान के बारे में दी गई मिश्रित प्रतिक्रिया से पता चलता है जबकि मैं स्वयं ही संविधान में शामिल प्रत्येक चीज से सहमत नहीं हूँ फिर भी मैं किसी भी विरोधाभास की जरा सी भी आशंका नहीं रखते हुए यह कह सकता हूँ कि इसे इस सभा के बहुत बड़े वर्ग का भारी समर्थन प्राप्त है। निःसंदेह यह सच है कि मूल से प्रारुपित संविधान में काफी परिवर्तन किया जा चुका है। यह परिवर्तन देश की बदली दशा के अंतर्गत अवश्य भावी था.....
भारत सरकार अधिनियम (संशोधन) विधेयक
श्री सभापतिः आज जो हम पहला कार्य विधेयक से शुरू करेंगे जिसकी सूचना डॉ. अम्बेडकर ने दी है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बंबईः जनरल)ः महोदय, मैं भारत सरकार अधिनियम 1935 में और संशोधन करने वाले विधेयक को पुनःस्थापित करने की अनुमति चाहता हूँ।
श्री सभापतिः प्रस्ताव हैः
भारत सरकार अधिनियम, 1935 में और संशोधन करने वाले विधेयक को पुनःस्थापित करने की अनुमति दी जाए।
प्रस्ताव स्वीकार हुआ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं विधेयक पुनःस्थापित करता हूँ।
श्री सभापतिः विधेयक पुनःस्थापित किया जाता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर सभा द्वारा तत्काल विचार किया जाए।’’
$सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 24 नवंबर 1949, पृष्ठ 919-220