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214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैं संवैधानिक मामले से संबंधित केवल एक ही मुद्दे का उल्लेख करना चाहता हूँ। इस आधार पर एक गंभीर शिकायत की गई है कि बहुत अधिक केंद्रीयकरण किया जा चुका है और राज्यों को महज नगरपालिका जैसा बना दिया गया है। यह स्पष्ट है कि यह विचार न सिर्फ अतिशयोक्तिपूर्ण हैं बल्कि यह संविधान के बारे में गलत कहानी पर भी आधारित है केंद्र और राज्यों के बीच संबंध के मामले में इन मूलभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखना जरूरी है जिन पर यह संविधान टिका हुआ है। संघवाद का मूलभूत सिद्धांत यह होता है कि राज्यों और केंद्र के बीच विधायी और कार्यपालक कानूनों के आधार पर न होकर संविधान के द्वारा ही होना चाहिए। संविधान में यह किया गया है। हमारे संविधान के अंदर राज्यों को किसी भी रूप में अपने विधायी या कार्यपालक प्राधिकार को लागू करने के लिए व्यापक क्षेत्र प्रदान किए गए हैं जहाँ कि अंत संघवाद आधारित संविधानों की तुलना में अधिक हो। ये विशेषताएँ संघवाद के सार नहीं हैं संघवाद की मुख्य विशेषता जैसा कि मैं बता चुका हूँ संविधान का केंद्र और इकाइयों के बीच विघायी और कार्यपालक प्राधिकार का विभाजन किया जाना है। हमारे संविधान में यह सिद्धांत शामिल है। इसके बारे में कोई गलती नहीं हो सकती। इसलिए यह कहना गलत है कि राज्यों को केंद्र के अधीन रख दिया गया है केंद्र अपनी मर्जी से उस विभाजन की सीमा को नहीं।

‘‘न्यायालय संशोधन कर सकता है, इसे बदल नहीं सकता वे पहले के

निर्वाचनों को नये तर्क के रूप में संशोधित कर सकते हैं, नए विचार प्रस्तुत

किए जा सकते हैं, वे सीमांत मामलों की विभाजन रेखा को बदल सकते हैं

लेकिन उन बाधाओं को पार नहीं कर सकते, शक्ति के निश्चित निर्धारण को

वे बदल नहीं सकते। वे विद्यमान शक्तियों को व्यापक अधिकार तो प्रदान

कर सकते हैं, लेकिन किसी को स्पष्ट तौर पर दिए गए प्राधिकार किसी दूसरे

को नहीं दे सकते।’’

अतः केंद्रीयकरण जिससे संघवाद विफल होता है का पहला आरोप वापस लिया जाना चाहिए।

दूसरा आरोप यह है कि केंद्र को राज्यों को अवक्रमित करने की शक्ति दे दी गई है। यह आरोप को स्वीकार किया जाने योग्य नहीं है। लेकिन इन अवक्रमणकारी शक्तियों को शामिल किए जाने हेतु संविधान की निंदा करने से पूर्व कुछ बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। पहली बात तो यह कि ये अवक्रमाण्कारी शक्तियाँ संविधान

$सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 25 नवंबर 1949, पृष्ठ 966

$वही, पृष्ठ 970

* सी.ए.डी. आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 25 नवंबर 1949, पृष्ठ 972-981