खंड 4 - Page 23

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(ख) कोई भी भारतीय अपील या याचिका जिस पर न्यायिक समिति ने पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय आदेश सुरक्षित रखा हो, अथवा

(ग) कोई भी भारतीय अपील जिसकी प्रविष्टि 1949 की त्रैमासिक बैठकों (माइकल मारन) के लिए न्यायिक समिति की कार्यावलि में नियत तिथि से पूर्व हो चुकी हो तथा उस तिथि के बाद न्यायिक समिति के प्राधिकार के द्वारा या कोई निर्देश नहीं दिया गया हो_ अथवा_

और उपखंड (ग) को उपखंड (घ) के रूप में लिखा जाए।’’

संभवतः उपखंड (ग) के मामले में कुछ स्पष्टीकरण दिया जाना जरूरी है। यद्यपि हमने मुख्य खंड में कहा है कि त्रैमासिक कर वसूली के कैलेंडर में प्रविष्ट कोई कार्य या मामले को निपटाने के लिए प्रिवी काउंसिल पर छोड़ा जा सकता है, फिर भी यह बिल्कुल निश्चित नहीं है कि उनमें से कितने मामले बिना निपटाये लंबित रहेंगे। इसलिए हम प्रारंभ में ही प्रिवी काउंसिल को इस बात की अनुमति देने का प्रस्ताव करते हैं कि यद्यपि कोई मामला या मुकदमा त्रैमासिक कर वसूली की सूची में प्रविष्ट हो तो प्रिवी काउंसिल कुछ मामलों की सुनवाई करने में समर्थ नहीं हे सकता है। अतः लंबित मामले बचे नहीं रहे। ऐसी स्थिति में जिन मामलों के बारे में प्रिवी काउंसिल निर्देश दें कि वह उनकी सुनवाई नहीं कर पाएगा, वे स्वतः ही फेडरल न्यायालय में स्थानांतरित हो जाएंगे। उस प्रकार की आकस्मिकता के लिए यह उपबंध किया गया है कि मैं संशोधन के मामले में यह उपखंड (ग) जोड़ रहा हूँ।