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माननीय डा. बी.आर. अम्बेडकरः कोई अपील लंबित नहीं है।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैंने डॉ. अम्बेडकर और डा. बख्शी टेकचन्द से यह सुना है कि कोई भी अपील लंबित नहीं है। लेकिन, अन्य प्रकार की कार्यवाहियाँ हो सकती हैं। मेरा यह कहना है कि यदि कोई कार्यवाही लंबित हो जिसके माधयम से संबंधित व्यक्तियों को राहत दिया जाना संभव हो, तो उसे महज इस कारण से कि हम प्रिवी काउंसिल का क्षेत्राधिकार समाप्त कर रहे हैं, उनके अधिकारों से उन्हें वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
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* माननीय डा. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि मेरे मित्र, पंडित ठाकुर दास भार्गव द्वारा प्रस्तुत संशोधन को स्वीकार करना आवश्यक है। जैसा कि मेरे मित्र श्री कृष्णमाचारी बता चुके हैं कि फेडरल न्यायालय से कोई भी अपील प्रिवी काउंसिल में लंबित नहीं है और परिणामतः किसी प्रकार के अपवाद का उपबंध करना, जैसा कि मेरे मित्र पंडित ठाकुर दास भार्गव ने प्रस्ताव किया है, बिल्कुल अनावश्यक है क्योंकि कोई मामला लंबित नहीं होने के कारण वास्तव में किसी पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने जा रहा है।
मेरे मित्र, श्री नजीरुद्दीन द्वारा प्रस्तुत संशोधन का संबंध है, मैं यह समझा नहीं पा रहा हूँ कि हमें निर्धारित सिद्धांत कि प्रिवी काउंसिल के समक्ष दर्ज किसी आपराधिक मामले को स्वीकार करने के उद्देश्यों के प्रयोजनार्थ निर्धारित तिथि से पूर्व सुना जा सकता है, लेकिन उसे अंतिम रूप से निपटाने के लिए फेडरल न्यायालय को वापस कर दिया जाएगा, से अलग क्यों हटना चाहिए। वह इससे अलग हटना चाहते हैं लेकिन, उन्होंने जो तर्क दिए हैं उसमें मुझे कुछ भी जरूरी बातें नहीं दिख रही हैं।
{ पंडित ठाकुर दास भार्गव संशोधन अस्वीकृत हुआ और नजीरुद्दीन का संशोधन वापस लिया गया। खंड 3 विधेयक में जोड़ा गया। }
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खंड 4
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः खंड 4 के उपखंड (ख) के स्थान पर निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित किए जाएँः-
** सी.ए.डी खंड 9, 17 सितंबर, 1949 पृष्ठ 1599वही पृष्ठ 1599-1600