अनुच्छेद 303 (क्रमागत) - Page 30

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श्री सभापतिः इसमें कोई भी संशोधन नहीं है। चूँकि कोई बोलने का इच्छुक नहीं है इसलिए मैं इस पर मत लूँगा।

{ प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। }

* * * * *

1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 303 के खंड (1) के उपखंड (ढ) के बाद निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित किए जाए अर्थात्ः-

( << ) ‘‘शासक से ऐसा राजा, प्रमुख या अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे संविधान (छब्बीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1971 के प्रारंभ से पहले किसी समय, राष्ट्रपति से किसी देशी राज्य के शासक के रूप में मान्यता प्राप्त थी या ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे ऐसे प्रारंभ से पहले किसी समय, राष्ट्रपति से ऐसे शासक के उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता प्राप्त थी_

* * * * *

श्री सभापतिः इसमें कोई संशोधन नहीं है। मैं इस पर मत लूँगा।

{ संशोधन स्वीकृत हुआ। }

2 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ_

‘‘कि सूची IV (आठवें सप्ताह) के संशोधन संख्या 147 का संदर्भ लेते हुए अनुच्छेद 300क के खंड (1) के उपखंड (ब) के स्थान पर निम्नलिखित उपखंड प्रतिस्थापित किए जाएँः

( < ) ‘‘अनुसूचित जातियों’’ से आशय ऐसी जातियाँ, नस्ल या जनजातियाँ अथवा ऐसी जातियों, नस्लों या जनजातियों के भाग या उनके समूह से है, जिन्हें इस संविधान के प्रयोजनों के लिए अनुच्छेद 300क के अधीन अनुसूचित जातियाँ समझा जाता है_

एक ही परिवर्तन यह है कि ‘विनिर्दिष्ट’ को बदलकर ‘प्रतीत होता है’ शब्द डाल दिया गया है।

महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

1 सी.ए.डी खंड 9, 17 सितंबर, 1949 पृष्ठ 1633

2 वही, 1636-37