अनुच्छेद 303 (क्रमागत) - Page 29

14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 303 (क्रमागत)

1 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 303 के खंड (1) के उपखंड (1) के बाद निम्नलिखित

खंड अंतःस्थापित किए जाएँ, अर्थात्ः-

II. ‘उच्च न्यायालय’’ से अभिप्राय ऐसे न्यायालय से है जो इस संविधान के

प्रयोजनों के लिए किसी राज्य के लिए उच्च न्यायालय समझा जाता है और

इसके अंतर्गत-

(i) भ् ारत के राज्यक्षेत्र में इस संविधान के अधीन उच्च न्यायालय के रूप

में गठित या पुनर्गठित कोई न्यायालय है, और

(ii) भारत के राज्यक्षेत्र में संसद द्वारा विधि इस संविधान के सभी या

किन्हीं प्रयोजनों के लिए उच्च न्यायालय के रूप में घोषित कोई अन्य

न्यायालय है_

III. ‘‘देशी राज्य’’ से ऐसा राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है -

(i) ि जसे इस संविधान के शुरू होने से पूर्व की अवधि से पहले भारत

भारतीय नियंत्रण सरकार से ऐसे राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त थी

की और

(ii) ि जसे इस संविधान के शुरू होने के बाद की अवधि के बाद भारतीय

नियंत्रण की सरकार से एसे राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त थी जो

भारत के राज्यक्षेत्र का भाग नहीं था।

* सी.ए.डी. खंड 9, 17 सितंबर, 1949, पृष्ठ 1653