अनुच्छेद 1 - Page 50

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसे बहुत कम समय में समाप्त किया जा सकता है।

श्री सभापतिः हम क्या कर सकते हैं? किसी भी सदस्य के लिए बाधा डालने का खुला विकल्प है। छियासी सदस्य उपस्थित हैं और हमारे नियमों के अधीन कुल सदस्यों के एक तिहाई सदस्यों से कोरम पूरा होता है और यह करीब 97 होता है। अतः अभी कोरम पूरा नहीं है। मुझे सभा को स्थगित करना पड़ेगा। और कोई रास्ता नहीं है।

एक माननीय सदस्यः इस अनुच्छेद को अगले सत्र में लिया जाए।

दूसरा माननीय सदस्यः हम कल बैठक कर सकते हैं।

दूसरा माननीय सदस्यः कल भी कोरम पूरे होने की गारंटी नहीं है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हम कुछ सदस्यों को जो बाहर हो सकते हैं, ला सकते हैं। घंटी बजाई जाए।

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* श्री एच. वी. कामथः कुछ लोग आपत्ति कर सकते हैं कि इसे (भारत का नाम) दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र जिसे ‘‘सर्वदमन’’ या सभी को पराजित करने वाले के रूप में जाना जाता है, जिसने इस प्राचीन भूमि में अपनी राज्यसत्ता और आधिपत्य स्थापित किया था। उनके नाम पर इस इस भूमि को भारत के नाम से जाना जाता है। दूसरे शोध विद्वानों का यह मानना है कि भारत नाम वैदिक युग के समय से यही रहा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बंबई जनरल)ः क्या इस सबके बारे में पता करना जरूरी है। मैं इसका प्रयोजन नहीं समझ पा रहा हूँ। किन्हीं अन्य स्थानों पर और भी रोचक वर्णन हो। मेरे मित्र ने ‘भारत’ शब्द स्वीकार किया है। बात केवल इतनी सी है कि उन्हें एक विकल्प मिला है। मुझे बड़ा खेद है लेकिन सभा के समक्ष सीमित समय को देखते हुए समय के अनुपात का ध्यान रखना चाहिए।

श्री एच.वी. कामथः मैं आशा करता हूँ कि सभा के कार्य को विनियंत्रित करना डा. अम्बेडकर का का नहीं है।

श्री सभापतिः आप क्या संशोधन प्रस्तुत कर रहे हैं?

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