36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
1 श्री सभापतिः आप एक संशोधन प्रस्तुत कर सकते हैं। मैंने आपको दोनों संशोधन प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी लेकिन मैं पाता हूँ कि दोनों ही संशोधन एक दूसरे के विरोधी हैं।
श्री एच. वी. कामथः क्या वे अंतर्विरोधी हैं, महोदय? यदि आप कहते हैं कि वे अंतर्विरोधी हैं, मुझे कुछ नहीं कहना है
श्री सभापतिः हाँ, यदि एक स्वीकृत हो जाता है तो दूसरा खारिज हो जाएगा।
श्री एच. वी. कामथः मेरा उद्देश्य तो यह है बल्कि यदि एक स्वीकृत न हो, दूसरे को स्वीकार किया जाए।
माननीय डा. बी. आर. अम्बेडकरः इस पर इतनी बहस क्यों हो रही है?
श्री शंकरराव देव (बंबईः जनरल)ः सभापीठ के साथ कोई बहस नहीं होनी चाहिए।
श्री एच. वी. कामथः श्री शंकरराव देव, मुझे नियमों की जानकारी है।
श्री सभापतिः आप एक प्रस्तुत कर सकते हैं।
* * * * *
1 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः प्रांतों और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित अनुच्छेद 3 के खंड को बदलने का प्रस्ताव है। भाग I और भाग III में शामिल सभी राज्यों को समान स्तर पर ले आया जाएगा। अनुच्छेद में एक संशोधन है और उस अंतर को खत्म कर लिया जाएगा और यह हटा जाएगा।
श्री बी. एम. गुप्तेः वह तो ठीक है किंतु मैं यह कह रहा हूँ कि मैं केंद्र को मजबूत बनाए जाने के विरोध में नहीं हूँ। लेकिन साथ ही हमने इकाइयों को भी गौरवपूर्ण स्थान दिया है। हम राज्यों की शक्ति वापस ले रहे हैं और उन्हें केंद्रीय या समवर्ती सूची में डाल रहे हैं हमने इकाई के लिए राज्य शब्द का प्रयोग किया है।
* * * * *
1 2 सी.ए.डी. खंड 9, 18 सितंबर, 1949, पृष्ठ 1674वही, पृष्ठ 1685