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‘‘कि पैरा 7 के स्थान पर निम्नलिखित पैरा प्रतिस्थापित किया जाएः-
‘7. किसी राज्य के मंत्रियों को वर्तमान में ऐसे वेतन और भत्तों का भुगतान किया जाएगा जो इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के प्रांतों या भारतीय रियासत के मंत्रियों को देय थे, जो भी स्थिति हो।
भाग III
लोक सभा के अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति को ऐसे वेतन और भत्तों का संदाय किया जाएगा जो इस संविन के प्रारंभ से ठीक पहले भारत डोमिनियन की संविधान सभा के अध्यक्ष को संदेय थे तथा लोक सभा के उपाध्यक्ष को और राज्य के उपसभापति को ऐसे वेतन और भत्तों का संदाय किया जाएगा जो इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत डोमिनियन की संविधान सभा के उपाध्यक्ष को संदेय थे।
8. राज्य की विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को तथा राज्य की विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को ऐसे वेतन और भत्तों का संदाय किया जाएगा जो इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले क्रमशः तत्थानीय प्रांत की विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को तथा विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को संदेय थे और जहाँ ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले तत्स्थानी प्रांत की कोई विधान परिषद् नहीं थी वहाँ उस राज्य की विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को ऐसे वेतन और भत्तों का संदाय किया जाएगा जो उस राज्य का राज्यपाल अवधारित करे।
भाग IV
दूसरी अनुसूची के भाग IV के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किए जाएः
उच्च न्यायालय और पहली अनुसूची के भाग I में उल्लिखित राज्यों के उच्च न्यायालय
के न्यायाधीशों के बारे में उपबंध
10. (1) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को वास्तविक सेवा में बिताए समय के लिए प्रतिमास निम्नलिखित दर से वेतन का संदाय किया जाएगा अर्थात्-
मुख्य न्यायमूर्ति - 15,000 रुपए।
कोई अन्य न्यायाधीश - 4,000 रुपए।
परंतु यदि उच्चतम न्यायालय का कोई न्यायाधीश अपनी नियुक्ति के समय भारत सरकार की या उसकी पूर्ववर्ती सरकारों में से किसी की अथवा राज्य की सरकार