प्रस्तावना
महाराष्ट्र इस मामले में सौभाग्यशाली कहा जायेगा कि यहां समाज सुधारों की लंबी परम्परा रही है। यूरोप में जिस तरह ईसाई धर्म ने राजा और रंक को ईश्वर की दृष्टि में समान बताकर वहां समानता के एक युग की शुरूआत की, उसी तरह ज्ञानेश्वर, नामदेव, तुकाराम, गोरा कुम्भार तथा चोखा मेला जैसे संतों ने दया, समानता तथा उपासना की स्वतंत्रता के उपदेश देकर बड़े पैमाने पर सामाजिक परिवर्तन किये। जाति की बाधाएं समाप्त की गई। महान मराठाक्षत्रप शिवाजी के नेतृत्व में मराठा शक्ति के उत्थान से यह साबित हो गया कि एक लोकप्रिय नायक राजा बन सकता है। राजनीतिक समानता का अभ्युदय शिवाजी के काल से ही हुआ। महाराष्ट्र के इन संतों ने धर्म में लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जाति-वर्ग के बंधनों को तोड़ने का उपदेश किया। वारकरी संप्रदाय जाति-पाति को स्वीकार नहीं किया। वारकरी सम्प्रदाय के लोग भ्रातृत्व की सच्ची भावना को व्यक्त करने के लिए एक ही रोटी को बारी-बारी खाते और जुलूस में एक साथ चलते थे। ईश्वर की प्राप्ति का उनका ढंग समान था। वारकारियों के भक्ति आन्दोलन ने उपासना की स्वतंत्रता को विस्तृत और गहरे आयाम दिये।
संविधान का अनुच्छेद 25 इसी तरह के स्वतंत्रता की अनुमति प्रदान करना है। हिंदू आचार संहिता में डॉ. अम्बेडकर द्वारा लाये गये सुधारों को कमोबेश सबने अपना लिया है। उन्होंने हिंदुओं के लिए समान नागरिक संहिता की नींव रखी और इसे भारतीय समाज के अन्य वर्गों में भी लागू करने योग्य बनाया। हालांकि, धार्मिक विश्वासों तथा व्यवहारों में सुधारों की गति बहुत धीमी और स्वैच्छिक है। आशा है कि विभिन्न संप्रदायों के नेतृत्वकर्ता इस संबंध में डॉ. अम्बेडकर के द्वारा सुझाये गये दिशा-निर्देशों का लाभ उठायेंगे और वे देश में विभिन्न संप्रदायों के मध्य संवाद आरम्भ करेंगे ताकि कानूनों में अपेक्षित सुधार हो सके। धार्मिक और सामाजिक सुधारों ने महाराष्ट्रियन समाज में जागृति ला दी। हिंदू आचार संहिता के ढांचे के तहत इसमें और कानून सुधारों की गुंजाइश थी। वर्षों से हिंदू आचार संहिता में परिवर्तन होते आये हैं, तथा संप्रेषण के द्वार खुलते रहे हैं। विवाह, तलाक तथा उत्तराधिकार के बारे में हिंदू को संहिताबद्ध कर डॉ. अम्बेडकर ने हिंदू आचार संहिता को तर्कसंगत बनाया और इसे इसकी खोयी गरिमा वापस पुनः प्रदान की। डॉ. अम्बेडकर ने विवाह को एक संस्कार बनाये रखने का बल दिया और पारिवारिक मूल्यों के विकास को प्रोन्नत किया। संविधान की भावना के अनुरूप, संशोधित हिंदू आचार संहिता में व्यक्तियों को अपने धर्म का अनुपालन करने और उसका प्रचार