(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 321

306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अध्यक्षः ये प्रस्ताव बिल्कुल भी प्रस्तुत नहीं किए गये। मैंने उनको सभा के समक्ष नहीं रखा।

श्रीमती दुर्गाबाईः माननीय सदस्य ने प्रस्तुत किया, परन्तु उस पर जोर नहीं दिया।

माननीय अध्यक्षः इससे क्या अन्तर पड़ता है? वह प्रस्तुत करें और उनके विरुद्ध मतदान हो तो क्या इसका अर्थ यह है कि ऐसा प्रस्ताव कभी दोबारा नहीं लाया जा सकता?

श्री त्यागीः केवल आज के लिये हम नैतिक रूप से बंधे हैं।

माननीय अध्यक्षः नैतिक बंधन सदा रहा है। अब इस पर चर्चा न की जाए। हम कार्यसूची की अगली मद पर आते हैं।

श्रीमती रेणुका रे (पश्चिम बंगाल)ः उठी।

माननीय अध्यक्षः अब बात समाप्त हो गयी है और उस पर आगे कोई चर्चा नहीं हो रही।

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