संपादकीय
प्रस्तुत खंड में हिंदू आचार संहिता के संहिताकरण के बारे में दिये गये डॉ. अम्बेडकर के भाषणों को लिया गया है। हिंदू आचार संहिता के विशेष उपांगों को संशोधित करने और उन्हें संहिताबद्ध करने से संबंधित विधेयक को एक प्रवर समिति को सौंपा गया था। इस समिति में सर अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, डॉ. बक्शी टेकचन्द, श्री एच.वी. कामत, श्रीमती जी. दुर्गाबाई जैसे विख्यात न्यायविद् और सांसद विद् सहित कई अन्य व्यक्ति शामिल थे। प्रवर समिति के सदस्यों की सूची पढ़ने से ऐसा लगता है जैसे ख्याति प्राप्त भारतीयों की नामावली पढ़ी जा रही हो।
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 तथा हिंदू विवाह अधिनियम,1955 हिंदू संहिता अधिनियम, जिनका यह विधेयक पूर्वगामी हैµके पहले, हिंदू आचार संहिता प्रायः संहिताबद्ध नहीं था, यद्यपि इसके कुछ उपांगों जैसे संपत्ति पर हिंदू महिलाओं का अधिकार कानून,1937 विधायी हस्तक्षेप के विषय थे। भारतीय उच्च न्यायालयों तथा प्रिवी परिषद् के अनगिनत निर्णयों में उद्धृत हिंदू आचार संहिता विधान किये जाने का एक स्रोत था इसलिए आवश्यक था कि हिंदू आचार संहिता का समेकन और संहिताकरण करके इसे एक निश्चित स्वरूप और आकार दिया जाये। संहिताकरण में सैद्धान्तिक रूप से जिन बातों को शामिल कि गया था, वे थीµ(1) सम्पत्ति का अधिकार, (2) सम्पत्ति के उत्तराधिकार का अनुक्रम, (3) गुजारा, विवाह, तलाक, गोद लेना, अवयस्कता तथा वैधानिक संरक्षण। हिंदू आचार संहिता के दोनों मतों मिताक्षर और दायभाग ने असमानता को पैदा किया और बढ़ावा दिया था। मिताक्षर मत ने हिंदू की सम्पत्ति को समांशिता सम्पत्ति माना जिसमें पुत्रों, पौत्रों तथा प्रपौत्रों का जन्म के कारण अधिकार बनता है। मिताक्षर के अनुसार सम्पत्ति का हस्तांतरण परिवार के जीवित व्यक्तियों को स्वतः हो जाता था जबकि दायभाग मत में निजी अधिकार के नियम और क्षमता के तहत संपत्ति का बंटवारा होता है। इसके अलावा इस विधेयक में विधवा स्त्री, पुत्री तथा विधवा बहु को सम्पत्ति का उत्तराधिकारी बनाने का लक्ष्य था।
यहां पर, न तो विधेयक को पेश करने के कारणों का उल्लेख उचित है और न ही विवाह तथा तलाक से संबंधित विधि के प्रावधानों का उल्लेख करना जरूरी है, क्योंकि पाठकों को इस बारे में विस्तृत जानकारी उन लब्धप्रतिष्ठ संसद सदस्यों के भाषणों से प्राप्त हो जायेगी जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में महिलाओं के मताधिकार के लिए डॉ. अम्बेडकर के साथ योगदान दिया।