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ऽहिंदू संहिता
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि हिंदू कानून के कुछ उपांगों को संशोधित और संहिताबद्ध करने संबंधी विधेयक को जारी रखा जाये।य्
माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव किया जाता हैः
फ्कि हिंदू कानून की कुछ उपांगों को संशोधित और संहिताबद्ध करने संबंधी विधेयक को जारी रखा जाये।य्
श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगालः मुस्लिम)ः महोदय, क्या मैं जान सकता हूँ कि इस महत्वपूर्ण विधेयक की वर्तमान स्थिति क्या है? मैं समझता हूँ कि इस विधेयक का हिंदू-मित्रों में काफी विरोध हो रहा है। इसलिए बेहतर हो कि यह पता चल जाये कि इस विधेयक की मौजूदा हालत क्या है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसे केवल प्रस्तुत किया गया था। इसे आगे नहीं बढ़ाया गया।
श्री आर.वी. धूलेकर (उत्तर प्रदेशः सामान्य)ः नयी व्यवस्था में हिंदू कानून अथवा मुस्लिम कानून का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। हमें केवल एक सामान्य कानून अपनाना चाहिए औरख्...,
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य गुण-दोष के आधार पर यह बात कह रहे हैं। जब सभा के सामने यह विधेयक आयेगा तब उन्हें भी बोलने का मौका मिलेगा। इस समय तो इसी बात पर विचार करना है कि विधेयक को जारी रखा जाये अथवा नहीं।
श्री आर.वी. धूलेकरः महोदय, तब तो मैं इसका विरोध करता हूँ। इसे जारी नहीं रखा जाना चाहिए।
माननीय अध्यक्षः हमें विचार करा है, फ्कि हिंदू कानून कुछ उपांगों को संशोधित और संहिताबद्ध करने संबंधी विधेयक को जारी रखा जाये।य्
प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।
ऽभारत की संविधान सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड 1, 17 नवम्बर, 1947, पृष्ठ 41