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(प्रवर समिति के द्वारा प्रस्तावित)
हिंदू विधि के कुछ उपबंधों को संशोधित और संहिताबद्ध करने संबंधी विधेयक
भारत के विभिन्न प्रांतों में इस समय लागू हिंदू विधि के कुछ उपबंधों को जहां कहीं संशोधित और संहिताबद्ध करना उचित है_
इसलिए अब इसे निम्नलिखित रूप में अधिनियमित किया जाता हैःµ
- इस संहिता के किसी भाग में उल्लिखित ‘हिंदू’ शब्द का आशय यह होगा कि
ऐसा कोई भी व्यक्ति जो यद्यपि धर्म से हिंदू न भी हो, फिर भी वह इस संहिता
के प्रावधानों से अधिशासित होता है।
3. परिभाषायेंः इस संहिता में, संदर्भ की आवश्यकताओं के अतिरिक्त ये सभी बातें समाहित होंगी।
(1) ‘एलियासान्तना विधि’ का तात्पर्य एक ऐसी विधि प्रणाली से है जो उन सभी
व्यक्तियों पर लागू की जाती है जो इस संहिता के पारित न होने की दशा में मद्रास
एलियासान्तना अधिनियम, 1949 (1949 के IX मद्रास अधिनियम) द्वारा शासित
होते।
(2) फ्परम्पराय् और फ्रीतिय् शब्दों का तात्पर्य ऐसे किसी नियम से है जिसका पालन
अनवरत और लंबे समय तक समान रूप से किया गया हो, और उसने किसी
स्थानीय क्षेत्र के हिंदुओं, जनजाति, समुदाय, दल अथवा कुटुम्ब में एक विधि के
रूप में मान्यता प्राप्त कर ली हों।
बशर्ते कि यह नियम सुनिश्चित और तर्कसंगत हो अथवा जनहित की नीति के विरुद्ध
न हो_ और
2. संहिता का लागू होनाः
(1) यह संहिता लागू होगीःµ
(क) सभी हिंदुओं पर अर्थात् उन सभी व्यक्तियों पर जो हिंदू धर्म को मानते हैं, इसके किसी भी रूपों अथवा विकासों में जिसमें वीरशैव अथवा लिंगायत और ब्रह्म, प्रार्थना अथवा आर्य समाज के सदस्य शामिल हों।
(ख) ऐसे किसी भी व्यक्ति पर जो बौद्ध, जैन अथवा सिक्ख धर्म के हो।
भाग 1
खंड 2 पृष्ठ 1 वीर शैल