358 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(ग) ( i ) किसी ऐसी संतान पर, चाहे वे वैध हो अथवा अवैध, जिनके माता-पिता
इस अनुच्छेद के अर्थों में हिंदू हों।
( ii ) किसी ऐसी संतान पर चाहे वह वैध हो अथवा अवैध, जिसके
माता-पिता में से कोई एक इस अनुच्छेद के अर्थों में हिंदू हो_ बशर्ते
कि ऐसे संतान का उस समुदाय, समूह अथवा परिवार के सदस्य के
रूप में पालन-पोषण किया गया हो जिनसे ऐसे माता-पिता का संबंध
हो अथवा संबंध रहा हो_ और
(घ) जिसने हिंदू धर्म अपना लिया हो।
(2) यह संहिता ऐसे अन्य व्यक्तियों पर भी लागू होगी जो धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी अथवा यहूदी न हों_ भाग 1 खंड 2पृष्ठ 1
(क) परन्तु यदि यह सिद्ध हो जाता है कि कोई ऐसा व्यक्ति जो
कि हिंदू कानून अथवा ऐसी परम्परा या रीति उस कानून के
एक भाग के रूप में इस संहिता में कही गई किसी बात में
परिपेक्ष्य में यह कानून पारित होने के पूर्व अधिशासित नहीं होता, ऐसा होने
पर यह संहिता उन मामलों पर इस पर लागू नहीं होगी।
(3) इस संहिता के किसी भी भाग में ‘हिंदू’ शब्द का आशय उस व्यक्ति के सम्मिलित
किये जाने से होगा जो यद्यपि धर्म से हिंदू नहीं है, तो भी इस संहिता के प्रावधानों
से अधिशासित होता है।
(4) विशेष विवाह अधिनियम, 1872 (1872 का III ) में अन्तर्निष्ट भाग 1
किन्हीं भी व्यवस्थाओं के होते हुए भी यह संहिता उन सभी हिंदुओं खंड 6
पर लागू होगी जिनके विवाह इस संहिता के लागू होने से पहले पृष्ठ और
इस अधिनियम के उपबंधों के अन्तर्गत हो गये हों। अनुसूची पृष्ठ 30
(3) परिभाषाएः इस संहिता में जब तक कि इस विषय अथवा संदर्भ में कुछ प्रतिकूल न होµ
( i ) ‘परम्परा’ और ‘रीति’ किसी ऐसे नियम को इंगित करता है जिसका भाग 1
पालन अनवरत और लम्बे समय तक समान रूप से किया गया खंड 4 और 5
हो और उसने किसी स्थानीय क्षेत्र, जनजाति, समुदाय समूह अथवा पृष्ठ 2
परिवार में हिंदुओं के बीच कानून का रूप प्राप्त कर लिया हैः
बशर्ते कि ये नियम सुनिश्चित और अतार्किक न हों अथवा जनहित
के विरुद्ध न होः