अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 452

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माननीय अध्यक्षः उन्हें इसे दोहराने की आवश्यकता नहीं है। वे अपनी बातें जारी रख सकते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः एक अन्य बात यह है कि प्रवर समिति को पर्याप्त अथवा स्पष्ट सूचना दिए बिना, केवल महत्वपूर्ण परिवर्तन ही नहीं किए गए हैं, बल्किख्...,

श्री कृष्णास्वामी भारतीः इसी बात पर ही हमें आपत्ति है। वे ऐसा नहीं कह सकते हम उसे भली-भांति जानते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यदि माननीय कानून मंत्री को बदलाव की जानकारी नहीं थी और यदि माननीय सदस्य मुझसे महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में बार-बार पूछ रहे हैं, तो इससे स्पष्ट होता है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है और उस जानकारी के बिना उन्होंने सदाशयी तरीके से बदलावों को स्वीकार कर लिया है। मैं सोचता हूँ कि उक्त बदलाव किसी अत्यधिक जलन रखने वाले व्यक्ति द्वारा तैयार किए गए थे, जिसने यह सोचे बिना बिल में सुधार करने की सोची और कुछ सदाशयी बदलाव किए कि वह एक बिल्कुल नया बिल तैयार कर रहा है और इस बारे में किसी ने भी विचार तक नहीं किया।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे वास्तव में इसका विरोध करना चाहिए। इससे ड्राफट्रसमैन की गलत छवि प्रस्तुत होती है। मेरे मित्र ने लगभग यह कह दिया है कि प्रवर समिति के विचार-विमर्श के पश्चात् ड्राफट्रमैन ने ही बिल में परिवर्तन के लिए समिति के दिमाग में बात डाली है। मैं इसका बड़ा विरोध करता हूँ।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः और हम उस तरीके का विरोध करते हैं जिस तरीके से वह प्रवर समिति के सदस्यों से पेश आ रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः क्या परिवर्तन प्रवर समिति की रिपोर्ट के बाद किए गए हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यही मत वे व्यक्त कर रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः उनका अभिप्राय है शायद पहले से हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः जी हाँ, श्रीमान्, मैं बिल्कुल आश्वस्त हूँ कि प्रवर समिति की बैठक से पहले ही परिवर्तन हो चुके थे।

माननीय अध्यक्षः मुझे लगता है कि इसमें कुछ गलतफहमी है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यदि मैं अपने मित्र का भाषण समझ चुका हूँ, तो इसका सामान्य आशय यही है कि प्रवर समिति ने बिना विचार किए आँखें मूंदकर रिर्पोट पर हस्ताक्षर किए हैं अथवा उनका आशय है कि