436 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय अध्यक्षः मुझे कहना है, इसमें नियम-भंग जैसी कोई बात नहीं है। ये टिप्पणियां हैं जिनसे, मैं मानता हूँ कि, कुछ सदस्य नाराज हो सकते हैं, किन्तु जब वह ‘विभागीय बिल’ शब्द का प्रयोग करते हैं, तो मैं नहीं समझता कि माननीय सदस्य यह मत व्यक्त करते हैं कि प्रवर समिति के सदस्यों ने मुद्दों पर विचार नहीं किया। जैसा मैंने देखा है, वह हर बार ‘प्रवर समिति के सदस्यों के विचारार्थ विभाग द्वारा तैयार बिल का प्रारूप’ कहने की बजाय संक्षिप्त रूप में ‘विभागीय बिल’ शब्द का प्रयोग करते हैं। मैं नहीं समझता कि हमें इस पर कुछ अलग विचार करना चाहिए और हमें इसका कोई और अर्थ भी नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि विभागीय बिल उसी का एक लघु रूप हैं। जैसा एक बार मैंने कहा कि जब सदन के एक अन्य माननीय सदस्य ने यह मुद्दा उठाया था, मैं नहीं जानता था कि क्या उस समय यह माननीय सदस्य उपस्थित थे। इससे यह बात निकलती है कि प्रवर समिति द्वारा किए गए परिवर्तन महत्वपूर्ण थे। और यदि परिवर्तन महत्वपूर्ण थे तो उन्हें वास्तव में यह कहने का अधिकार है कि बिल को पुनर्गठित अथवा पुनः परिचालित किया जाना चाहिए। इसमें तथ्य दिखाई देता है, भले ही वह अपने तरीके से अपनी बातें कह रहे हैं और इस बारे में बड़ी व्यापकता से अपने विचार रख रहे हैं, जो उन्हें थोड़े कम समय में रखने चाहिए।
श्रीमती जी. दुर्गाबाईः मेरा तर्क है कि वे प्रवर समिति के सदस्यों पर अनभिज्ञता का आरोप लगा रहे हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं जरा सी अनभिज्ञता का आरोप नहीं लगा रहा हूँ, किन्तु विभागीय बिल से जो लापरवाही सामने आ रही है, उससे पता चलता है कि उन्हें बदलावों का कोई सुराग नहीं मिला। (हस्तक्षेप)।
माननीय अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं ‘अनभिज्ञता’ शब्द का प्रयोग नहीं करूंगा किन्तु वे विभागीय बिल पर गलत विश्वास से तो प्रभावित हुए ही थे। (हस्तक्षेप)। यदि उन्हें अभी तक इसका आभास नहीं हुआ है, तो मैं इसके लिए क्षमा चाहता हूँ कि माननीय सदस्य अभी भी अपनी बात पर दृढ़ है।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य अब अलग तरीके से अपनी बातें कहें। उन्हें यह कहना चाहिए कि इस विषय पर अधिक ध्यान देना चाहिए था।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा यही आशय है। अपने तर्क के लिए वास्तव में मुझे किसी कठोर व्याख्या की आवश्यकता नहीं है-मैं शब्दों की बजाय कारणों पर अधिक ध्यान दिलाता हूँ। यदि मैंने किसी कठोर शब्द का प्रयोग किया हो, भले ही वह असंसदीय न हो, मैं उसे वापस लेता हूँ। तर्क यह है कि हमें पुनः इस बात से शुरूआत करनी चाहिए किख्...,