अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 481

466 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

एक उत्तराधिकारी होगा। सजातीय रिश्तेदारों के मामले में भी नजदीकी रिश्तेदार के न होने पर सजातीय रिश्तेदार, भले ही दूर का हो, वारिस होगा। अतः सजातीय रिश्तेदारों के मामले में यह परिवर्तन बिल्कुल नया है। नजदीकी रिश्तेदार के मामले में यह मूल धारा के अनुसार एक गंभीर अंतर है। वहाँ कहीं भी यह उल्लेख नहीं यि गया है कि सूचीबद्ध वारिसों के न होने की स्थिति में वे नजदीकी रिश्तेदार का रूख करेंगे, और उसके भी न होने की स्थिति में वे सजातीय रिश्तेदार का रुख करेंगे।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कॉग्नेट अथवा एग्नेट?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः कॉग्नेट। मेरा कहना है कि ये गंभीर परिवर्तन हैं। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार ये गंभीर नहीं है, क्योंकि परिवर्तन उनके द्वारा किए गए हैं।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः गंभीर और महत्वपूर्ण परिवर्तन।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यदि आप चाहती हैं तो महत्वपूर्ण भी। मैं भी सोचता हूँ कि ये परिवर्तन मात्र महत्वपूर्ण नहीं है, अपितु गंभीर भी है। गंभीर थोड़ा और आगे चला जाता है। वास्तव में, यह अनेक व्यक्तियों के उत्तराधिकार के अधिकार को सीमित कर देता है।

माननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य अपनी बात सायं पांच बजे तक समाप्त कर देंगे? इस विषय पर काफी कुछ कहा जा चुका है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः जी नहीं, श्रीमान्। कुछ सदस्यों को आश्वस्त करने के लिए इतना समय भी पर्याप्त नहीं है। मैं उन्हें पूर्णतया आश्वस्त करना चाहता हूँ।

श्री खुर्शीद लालः तब आपको कयामत के दिन तक बहस करनी होगी।

माननीय अध्यक्षः यदि वह अभी पांच घंटे तक आश्वस्त नहीं कर सके तो, अगले पांच घंटों में भी वह उन्हें आश्वस्त नहीं कर सकेंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः माननीय कानून मंत्री खाली दिमाग की नहीं, खुले दिमाग की बात करते हैं और वहीं काफी देर में समझ सकेंगे।

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