अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 480

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श्री नजीरुद्दीन अहमदः विचलनों को नोट नहीं किया गया है।

माननीय अध्यक्षः यह सच है कि उन्हें विचलनों के तरीके से नोट नहीं किया गया है। यह स्वीकार है कि विचलन हैं, किन्तु यह दर्शाने के के उद्देश्य से केवल कुछ महत्वपूर्ण लिए जा सकते हैं कि इन विचलनों के आधार पर विधेयक को पुनः प्रवर समिति को अथवा किसी अन्य प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए आवश्यक रूप से उस पर रायशुमारी के लिए पूरे देश में हर ओर भेजा जाना चाहिए। मैं सोचता हूँ कि हम उसी पर बहुत समय व्यतीत कर रहे हैं।

श्री बी. दासः श्रीमान्, मैं यह सब-कुछ बता चुका हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं एक दो सदस्यों के चिढ़ से बिल्कुल सहमत हूँ।

श्री बी. दासः श्रीमान्, वह उसी शब्द का प्रयोग कर रहे हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान्, मैं सदन का ध्यान विभागीय विधेयक की धारा 103 की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ, जो धारा 102 के तदनुरुप है।

माननीय अध्यक्षः मैं इस संदर्भ में पहले ही उल्लेख कर चुका हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह एक महत्वपूर्ण मामला है।

माननीय अध्यक्षः मैं माननीय सदस्य को केवल सुझाव दे सकता हूँ। मैं उनसे बहस नहीं कर सकता। मैं केवल यह कह सकता हूँ कि उदाहरणों में इजाफा नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार उदाहरणों की संख्या काफी अधिक है, किन्तु यदि वह सोचते हैं कि वह एक तथ्य भूल गए हैं, जो अन्यों से अधिक महत्वपूर्ण है, तो वह उस तथ्य को उजागर कर सकते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः विभागीय विधेयक की धारा 103 मूल विधेयक की धारा 102 के समकक्ष है जो नजदीकी वारसि (एग्नेट) को पांच कोटियों तक सीमित कर देती है। इस परिवर्तन में उत्तराधिकार को केवल पांच कोटियों तक सीमित किया गया है। सूची में किसी उत्तराधिकारी के नाम के न होने की स्थिति में, हिंदू कानून के अनुसार सम्पत्ति नजदीकी वारिस को दी जाएगी, किन्तु नजदीकी वारिस की परिभाषा गंभीर रूप से सीमित करके पांच कोटियों तक कम कर दी गई है। अगली धारा, जो विभागीय विधेयक की धारा 104 है, मूल विधेयक की धारा 103 के समकक्ष है, इसमें सजातीय रिश्तेदारों (कॉग्नेट) को भी पांच कोटियों तक सीमित रखा गया है। हिंदू कानून की अवधारणा और मूल विधेयक के अनुसार यह एक गंभीर अंतर है। कोई भी नजदीकी रिश्तेदार, भले ही वह दूर के रिश्ते से जुड़ा हो, प्राथमिकता वाले उत्तरराधिकारियों की अनुपस्थिति में