भारतीय गैर-न्यायिक भारत - Page 532

517

यदि मृतक ने अपने जीवनकाल में 14 डिग्री में शामिल किसी रिश्तेदार को कभी याद ही नहीं किया, उसे उत्तराधिकार के कारण उसकी सम्पत्ति में हिस्सा क्यों दिया जाए। इस कारण से प्रवर समिति ने यह उपबंध स्वीकार किया है।

मैं सदन का ध्यान एक बात की ओर दिलाना चाहता हूँ कि प्रवर समिति ने उस विधवा को भी अयोग्य करार दिया है, जो दूसरा विवाह कर लेती है, उससे उत्तराधिकार का अधिकार छीन लिया गया है।

इसके बाद पुत्री के हिस्से की बात है, जो कि मूल विधेयक में दिया गया है। प्रवर समिति ने इसमें एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। मूल विधेयक में कहा गया है कि पुत्री का हिस्सा पुत्र के हिस्से के आधे के बराबर होगा और इसमें समानता लाने के लिए उन्होंने व्यवस्था दी है कि महिला की स्त्रीधन सम्पत्ति में पुत्र का हिस्सा पुत्री के हिस्से के आधे के बराबर होगा, ताकि पुत्री को पिता की सम्पत्ति में आधा तथा पुत्र को मां की सम्पत्ति में आधा हिस्सा मिलेगा। मैं यह नहीं कह सकता कि यह एक असमान बंटवारा था परन्तु फिर भी उन्होंने पिता की सम्पत्ति में पुत्री के हिस्से को बराबर कर दिया है अर्थात् आधे हिस्से को पूरा हिस्सा कर दिया है। जो कि पुत्र के हिस्से के बराबर है। ( एक माननीय सदस्य ः पुत्र को भी दिया गया है।) मुझे उसकी जानकारी है। जहां तक महिला के उत्तराधिकार का संबंध है, प्रवर समिति ने इसमें दो परिवर्तन किए हैं। वर्तमान नियमों के अन्तर्गत महिला की सम्पत्ति में पति के उत्तराधिकार की बारी काफी बाद में आती है और यह व्यवसाय राव समिति ने की थी। प्रवर समिति के विचार में यह अन्याय है क्योंकि आमतौर पर पत्नी को स्त्रीधन सम्पत्ति या कोई और सम्पत्ति ज्यादातर पति से मिलती है। अतः यह उचित नहीं है कि उसे किसी और वारिस को दिया जाए। इसके परिणामस्वरूप, प्रवर समिति ने इसमें परिवर्तन किया है और स्त्रीधन के अन्य वारिसों की सूची में पति को भी ला दिया है। ताकि अन्य वारिसों की तरह पति को भी पत्नी की सम्पत्ति में हिस्सा मिल सके। जैसा कि मैंने कहा इससे पिता की सम्पत्ति में पुत्री का हिस्सा बढ़ जाता है और इसके साथ-साथ मां की स्त्रीधन सम्पत्ति में पुत्र का हिस्सा बढ़कर पुत्री के समान हो गया।

माननीय उपाध्यक्षः उन्होंने पुत्र और पुत्री को बराबर कर दिया।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः भरण-पोषण संबंधी कानून में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है और इसके बारे में सदन को बताने की जरूरत नहीं है।

अब संयुक्त परिवार का प्रश्न उठता है। यह कहा गया है कि प्रवर समिति से आए विधेयक में संयुक्त परिवार संबंधी उपबंध बिल्कुल नए हैं। मैं इसका खंडन करता हूँ। प्रवर समिति ने इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया है। राव समिति द्वारा तैयार किए गए प्रारूप में मिताक्षरा संयुक्त परिवार संबंधी उपबंध पहले ही दिए हुए हैं। और यह 9