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भाग 7 µ उत्तराधिकार
अध्याय 1
प्रयोग
94. इस भाग के अमल के बाहर रखी कुछ जागीरेंः ये भाग इन पर लागू नहींख्....,ः
(1) कोई जागीर जो रिवाज के तौर पर अथवा किसी अनुदान के तौर पर या किसी
कानून द्वारा किसी एक उत्तराधिकारी को जाती हो, और अन्य कोई संपत्ति जो धारा
90 ज में बताई गई हो, अथवा,
(2) कोई संपत्ति जो भाग 5 के प्रावधान के अनुसार सहदायिकी के किसी उत्तरजीवी
सदस्यों को उत्तरजीविता के अनुसार मिली हो,
(3) कोई जागीर जो एक तारवाड़, तावाझी, कावारू अथवा इलियम जिस पर धारा 90 इ
लागू होती हो।
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95. भाग पर अमलः धारा 94 के प्रावधान में जो स्पष्ट रूप से कहीं गई है को छोड़कर यह भाग इस संहिता के लागू होने के बाद किसी मरते हुए निर्वसीयती हिंदू के उत्तराधिकार के निम्न मामलों को अधिनियमित करती है, यथाः-
(क) चल संपत्ति के मामलों में बशर्तें ये सिद्ध हो जाए कि वह निर्वसीयती स्त्री या
पुरुष अपनी मृत्यु के समय उस क्षेत्र जिसमें ये अधिनियम लागू होता है, निवासी
नहीं था_
(ख) अचल संपत्ति के मामले में जहां संपत्ति कथित सीमा में आती हो चाहे मृत्यु के
समय वह निर्वसीयती उस कथित क्षेत्र का निवासी हो अथवा नहीं_
स्पष्टीकरण-इस भाग के उद्देश्य के लिए किसी हिंदू का निवासस्थान भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का XXXIX ) की धारा 6 से 18 में दिए गए प्रावधान के अनुसार निश्चित होगा।