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अध्याय 2
हिंदू पुरुषों की निर्वसीयत उत्तराधिकार संपत्ति में उत्तराधिकार
सामान्य सिद्धांत
98. परिभाषाः
(1) इस भाग के संबंध में विषय या संदर्भ के विरुद्ध बशर्ते न होµ
(क) फ्गोत्रजय्- एक व्यक्ति दूसरे का गोत्रज माना जाएगा यदि
दोनों पुरुषों में रक्त संबंध हो या दत्तक संबंध हो_
(ख) फ्बंधुय्- वह व्यक्ति दूसरे का बंधु माना जाएगा यदि
दोनों पुरुषों में खून का संबंध या दत्तक संबंध हो_
(ग) ‘‘उत्तराधिकारीय् से अभिप्राय कोई स्त्री या पुरुष जिसे
इस भाग के तहत किसी निर्वसीयती के उत्तराधिकारी
के रूप में निश्चित किया गया हो_
(घ) फ्निर्वसीयतीय् वह व्यक्ति जिसने अपनी संपत्ति के संबंध
में वसीयत न की हो और ऐसी संपत्ति को निर्वसीयती
छोड़ कर मर गया हो।
(2) इस भाग में प्रयुक्त पुरुष संबंधी शब्दों में यदि विषय या संदर्भ में जरूरी न हो तो इसमें महिलाओं को शामिल न किया जाए।
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भाग 2, धारा 2, पृष्ठ 2 और भाग 2, धारा 5, पृष्ठ 2
98. हिंदू पुरुषों के संबंध में उत्तराधिकार के सामान्य नियमः इस भाग के प्रावधान वह संपत्ति जो कोई हिंदू पुरुष मरते हुए निर्वसीयती छोड़ गया, में तय नियमों के अनुसार हस्तांतरित की जाएगीः-
(क) प्रथम, सातवीं अनुसूची के वर्ग 1 में तय संबंधी होने के नाते
प्रथमिकता प्राप्त उत्तराधिकारियों को_
(ख) द्वितीय, यदि वर्ग 1 में शामिल संबंधियों में प्राथमिकता के अनुसार यदि कोई उत्तराधिकारी न हो तो सातवीं अनुसूची के वर्ग 2 में दिए संबंधियों को प्राथमिकता के अनुसार_
भाग 2, धारा 4, पृष्ठ 4