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उत्तराधिकारियों की अपात्रता
116. संन्यासी आदि अपात्र हैंः कोई व्यक्ति जिसने पूरी तरह व अंतिम रूप से धारा 110 की उप-धारा 1 के अनुसार परित्याग कर दिया है वह किसी भी संबंधी, चाहे वह रक्त से हो, विवाह से हो अथवा दत्तक से हो, की संपत्ति में दाय के लिए अपात्र माना जाएगा।
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117. अपवित्र पत्नी अपात्र हैः ऐसी स्त्री जो विवाह के पश्चात् अपने पति के जीवन काल मे अपवित्र हो, संपत्ति में दाय के लिए अपात्र मानी जाएगी बशर्ते उसने अपनी अपवित्रता को निरस्त न किया होः
बशर्ते कि किसी ने ऐसी स्त्री पर पति की संपत्ति में दाय पर सवाल न खड़े किए हों और ऐसी कानूनी कार्रवाई जिसमें वह और उसका पति पक्षकार हों, कोर्ट ने उसे अपवित्र माना हो और बाद में इस मुद्दे के बारे में कोर्ट की राय बदल न गई हो।
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118. कुछ विधवाओं के पुर्नविवाह करने से अपात्रताः किसी पूर्वमृतक पुत्र, पौत्र अथवा परपौत्र की विधवा, पिता या भाई की विधवा यदि निर्वसीयती के उत्तराधिकार के निर्धारण के समय पुनर्विवाह कर चुकी हो तो उन्हें उत्तराधिकार का अधिकारी नहीं माना जाएगा।