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(143)
119. खूनी व्यक्ति का अपात्र होनाः कोई व्यक्ति जो खूनी हो अथवा खून करने के लिए उकसाने का अपराधी हो, उसे उस व्यक्ति की संपत्ति में दाय, अथवा अन्य किसी संपत्ति के लिए भविष्य में उत्तराधिकार के लिए अपात्र माना जाएगा जिसका खून हुआ है, या जिसके खून करने के लिए उकसाया गया है।
(144)
120. वे वंशज जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया होः इस अधिनियम के लागू होने से पूर्व या पश्चात् जहां, कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म में परिवर्तन के बाद हिंदू न रह गया हो तो उसके धर्म परिवर्तन के बाद जन्मे वंशज अपने किसी भी हिंदू संबंधी की संपत्ति में दाय के लिए अपात्र है जब तक ऐसे बच्चे या वंशज उत्तराधिकार के निर्धरण के समय हिंदू हों।
(145)
121. उत्तराधिकारी के अपात्र होने पर उत्तराधिकार का निर्धारणः यदि इस अध्याय के प्रावधान अनुसार किसी व्यक्ति को उत्तराधिकार में दाय के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया है तब ऐसी संपत्ति का हस्तांतरण इस प्रकार होगा जिस प्रकार तब होता यदि ऐसा व्यक्ति निर्वसीयती से पूर्व मर चुका हो।
(146)
122. बीमारी, शारीरिक, विकलांगता इत्यादि अपात्रता नहीं हैंः किसी भी व्यक्ति को किसी संपत्ति से इस भाग में उल्लिखित कारणों के अतिरिक्त अन्य कारण, बीमारी, शारीरिक या विकलांगता आदि के कारण उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
(147)
राजसात
123. उत्तराधिकारियों का विफल होनाः यदि कोई निर्वसीयती इस भाग के प्रावधान के अनुसार अपने किसी पात्र उत्तराधिकारी को नहीं छोड़ गया है तो ऐसे में सारी संपत्ति सरकार को चली जाएगी और सरकार उस संपत्ति का उपयोग निर्वयसीयती के दायित्वों व जिम्मेदारियों को पूरा करेगी जैसे एक उत्तराधिकारी करता।