अध्याय 3- वसीयती उत्तराधिकार - Page 792

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संपत्ति के उत्तराधिकारियों की उस पर आश्रितों के पोषण का जिम्मेदारी-

130. आश्रितों का भरण-पोषणः धारा 131 के प्रावधान के अनुसार मृतक हिंदू के उत्तराधिकारी इस बात के लिए बाधय है कि वे उसके उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति पर आश्रितों का भरण-पोषण करें

भाग 3ए, धारा 5, पृष्ठ 12

इस भाग के उद्उेश्य के लिए मृतक के निम्न संबंधियों को उसका आश्रित माना गया हैः-

(1) उसके पिता_

(2) उसकी माता_

(3) उसकी विधवा तब तक जब तक पुनर्विवाह नहीं करती_

(4) उसका पुत्र, उससे पहले मृत्यु प्राप्त पुत्र का पुत्र, अथवा उसके पूर्व मृतक के पूर्व

मृतक पुत्र का पुत्र, जो कि अवयस्क है और तब तक जब तक वह अवयस्क

रहता है। परंतु ये उस सीमा तक होगा यदि वो, पोत्र है तो अपने पिता की जागीर

से, और यदि वह प्रपौत्र है तो अपने पिता या दादा की जागीर से भरण-पोषण

पाने में असमर्थ रहता है।

(5) उसकी अविवाहित कन्या तब तक जब तक वह अविवाहित रहती है_ (6) उसकी विवाहित कन्या_ परंतु ये उस सीमा तक होगा यदि वह अपने पति अथवा

अपने पुत्र, से यदि कोई है, या उसकी संपत्ति से भरण-पोषण प्राप्त करने में असमर्थ

रहती है_

(7) उसकी विधवा कन्या_

परंतु वह उस सीमा तक होगा यदि वो_

(क) अपने पति की जागीर से, अथवा

(ख) अपने पुत्र, अगर कोई हो अथवा उसकी जागीर से, अथवा

(ग) अपने ससुर या उसके पिता अथवा दोनों में से किसी की जागीर से भरण-पोषण

पाने में असमर्थ रहती है_

(8) उसके पुत्र की विधवा, अथवा उसके मृतक पुत्र के पुत्र की विधवा तब तक जब

तक वह पुनर्विवाह न कर लेः