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(156)
133. न्यायालय के विवेक के अनुसार भरण-पोषण की राशिः
(1) न्यायालय के विवेक पर होगा कि क्या भरण-पोषण की
राशि, और यदि है, तो कितनी राशि इस भाग के प्रावधान
के अनुसार तथा धारा 132 की उप-धारा (1) व उप-धारा
(2) को ध्यान में रखते हुए, जैसा भी मामला हो, जहां तक
वे लागू होते हैं, दी जानी चाहिए।
(2) एक अविवाहित कन्या के मामले में निर्वसीयती से प्राप्त
पैतृक संपत्ति से किसी भी मामले में आधे से अधिक नहीं
होनी चाहिए जितनी कि उसे मृतक से तब मिलती यदि वह
वसीयत न करके मर जाता।
(157)
134. परिस्थितियां बदलने पर भरण-पोषण की राशि को बदला जा सकता हैः भरण-पोषण की राशि चाहे वह न्यायालय की डिक्री द्वारा तय की गई हो या समझौते द्वारा, चाहे वह इस कानून के लागू होने से पूर्व निर्धरित की गई हो या बाद में_ उसे बाद में यदि परिस्थितियां बदलती हैं और उसे बदलना न्यायोचित हो तो बदला जा सकता है।
(158)
135. ऋणों को प्रमुखता दी जाएगीः इस भाग में दिए अन्य प्रावधानों के रहते हुए इस भाग में दिए भरण-पोषण के अधिकार की मांग से पहले ऋण के सारे विवरणों को प्रमुखता दी जाएगी।
(159)
136. भरण पोषण कब से लागू होगाः इस भाग के प्रावधान के अनुसार आश्रितों की मांग मृतक की संपत्ति या उसके किसी भाग पर लागू नहीं होगी यदि मृतक ने वसीयत द्वारा, न्यायालय की डिक्री द्वारा, आश्रित और सपत्ति या उसके किसी हिस्से या अन्य के मालिक के मध्य किसी तरह का समझौता हो।
भाग 3ए, धारा 6(2), पृष्ठ 13
भाग 3ए, धारा 7(2), पृष्ठ 14
भाग 3ए, धारा 8, पृष्ठ 14
भाग 3ए, धारा 9, पृष्ठ 14