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श्री आर. के. चौधरी : मैं केवल यह चाहता हूँ कि इस विधेयक के रचयिता तथा हमारे संविधान के संस्थापक डॉ. अम्बेडकर को उन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिनका कोई अर्थ नहीं है। जब ‘कन्वर्ट’ शब्द हिंदुओं पर लागू किया जाता है तो इसका कोई अर्थ नहीं है।
डॉ. अम्बेडकर : यह श्री चौधरी का दकियानूसी मत है।
श्री आर. के. चौधरी : क्या डॉ. अम्बेडकर कानून के किसी भी मूल पाठ का उल्लेख कर सकते हैं जिसमें यह कहा गया हो कि हिंदू धर्म में धर्म परिवर्तन सम्भव है?
डॉ. अम्बेडकर : मैं माननीय सदस्य के सामने मोरारजी बनाम महा प्रशासक का
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मामला रख सकता हूँ।
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बताता है कि एक ग्रीक ने हिंदू धर्म अपनाया था।
डॉ. टेक चंद (पंजाब) : अनेक ईसाई और मुसलमान, हिंदू बन गये हैं। यदि मेरे माननीय मित्र चाहते हैं तो वह भी ऐसे व्यक्तियों को ला सकते हैं तथा उन्हें आर्यों द्वारा हिंदू धर्म में परिवर्तित कर दिया जायेगा अथवा उन्हें हिंदू समाज में शामिल किया जायेगा। मेरे पास ऐसी अनेक पुस्तकें हैं जो मुस्लिम शासन के दौरान भी परिवर्तन के उदाहरण देती हैं तथा वह उन पुस्तकों को लेकर आराम से पढ़ सकते हैं।
डॉ. अम्बेडकर : ओह, ऐसा मत करो, श्री चौधरी कभी नहीं पढ़ते।
श्री आर. के. चौधरी : माननीय सदस्य धर्म परिवर्तन तथा पुनः धर्म परिवर्तन शब्दों के बीच उलझ रहे हैं। साथ ही, वह धर्म परिवर्तन और दीक्षा संस्कार शब्दों में उलझन पैदा कर रहे हैं। किसी भी व्यक्ति का हिंदू धर्म में प्रथम संस्कार किया जा सकता है। मैं उनके बारे में नहीं बोल रहा हूँ।
माननीय अध्यक्ष : परन्तु वह कहते हैं कि इसमें धर्म परिवर्तन भी हो सकता है।
श्री आर. के. चौधरी : महोदय, अब हमें इस मुद्दे को यहीं समाप्त कर देना चाहिए।
माननीय उपाध्यक्ष : मैंने सोचा कि माननीय मंत्री ने अपना भाषण समाप्त कर दिया है?
श्री आर. के. चौधरी : व्यावहारिक रूप से यह मेरे लिये अपनी बात समाप्त करना ही है। क्योंकि कल मैं शहर से बाहर जा रहा हूँ।