116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : इस विषय पर कई निर्णीत मामले हैं और यदि मेरे मित्र ‘‘मुल्ला व हिंदू लॉ’’ के प्रथम कुछ पृष्ठों का अध्ययन करेंगे तो वह अपनी इच्छानुसार जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
श्री आर. के. चौधरी : यदि डॉ. अम्बेडकर ‘शुद्धि’ की बात कर रहे हैं तो वह अलग बात है। यह उस हिंदू से संबंधित है जो हिंदू धर्म छोड़ने के बाद फिर हिंदू समूह में शामिल हो गया है। परन्तु किसी को भी हिंदू में परिवर्तन करने के लिए समारोह अथवा प्रक्रिया क्या है? यदि यह धर्म परिवर्तन का मामला है तो मैं इसकी प्रक्रिया जानता हूँ। संबंधित व्यक्ति को कुछ निश्चित समय के लिए व्रत करना चाहिए।
माननीय अध्यक्ष : क्या माननीय सदस्य इस संहिता में हिंदुओं में पुनः धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं?
श्री आर. के. चौधरी : मैं केवल यही कह रहा हूँ कि हिंदू धर्म में पुनः धर्म परिवर्तन हो सकता है। परन्तु इसमें धर्म-परिवर्तन नहीं हो सकता है। आप ‘‘कन्वर्ट’’ शब्द का प्रयोग मत कीजिए। उसके स्थान पर कोई और शब्द प्रयोग कीजिए।
माननीय अध्यक्ष : न्यायालयों ने निर्णय दिया है कि कोई भी व्यक्ति हिंदू धर्म में परिवर्तन उस स्थिति में भी कर सकता है जब वह मूल रूप से हिंदू समूह का भी न हो।
श्री आर. के. चौधरी : इसमें पुनः धर्म परिवर्तन हो सकता है, परन्तु धर्म परिवर्तन के बारे में आपका क्या कहना है? केवल उसी सम्बंध में यह मतभेद है।
श्री वेंकटरामन (मद्रास) : मद्रास उच्च न्यायालय ने रतनसी मोरारजी बनानम
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महा प्रशासक के मामले में यह निर्णय दिया है कि किसी भी व्यक्ति को हिंदू धर्म में धर्म परिवर्तन की छूट है।
डॉ. अम्बेडकर : यह अंग्रेज महिला से संबंधित था तथा प्रश्न यह था कि क्या एक ईसाई हिंदू धर्म अपना सकता है और इसका उत्तर था, हाँ।
श्री आर. के. चौधरी : क्या माननीय मंत्री मुझे बताएंगे कि इस तरह के धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया क्या है तथा इसके लिए कैसे समारोह की व्यवस्था है? अभी भी देर नहीं हुई कि मैं इस संबंध में जानकारी हासिल कर सकूँ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री स्वयं यह चाहते हैं कि हिंदू परम्पराओं आदि को संरक्षित रखा जाना चाहिए। अधिक से अधिक हिंदुओं को तथा अधिक से अधिक लोगों को हिंदू कानून में शामिल करने में नुकसान कहाँ है?