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हिंदू संहिताः जारी
खंड प्रति खंड चर्चा प्रवर समिति
* माननीय अध्यक्ष : संसद में अब हिंदू विधि की कुछ शाखाओं के संहिताकरण से जुड़े विधेयक में माननीय कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार संशोधन करने की कार्यवाही पर विचार किया जाएगा।
संशोधन पर चर्चा आगे शुरू हो रही है।ं
श्री आर. के. चौधरी (असम) : श्रीमान इससे पहले कि माननीय कानून मंत्री
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विधेयक को आगे बढ़ाएं, मेरा विनम्र निवेदन है कि यह तो हमें कार्यसूची के सबसे अधिक महत्वपूर्ण और छोटे विधेयकों पर अंतिम रूप से विचार कर और उसके बाद ही हिंदू संहिता विधेयक को और अंतिम रूप या फिर तय कर लें कि अब सबसे पहले हिंदू संहिता विधेयक को लेंगे और अंतिम रूप देने तक किसी भी दूसरे विधेयक को नहीं लिया जाएगा। इन दोनों रास्तों में से कोई एक अपनाया जाए। ऐसा लगता है कि कुछ लोग जो हिंदू संहिता विधेयक के बहुत अधिक पक्ष में सोचते हैं कि वे इस विधेयक पर चर्चा के लिए केवल समय के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं कि कुछ थोड़े समय उस पर विचार किया जाए और फिर एक लम्बे समय तक उसे स्थगित रख दिया जाए। इससे हर एक व्यक्ति के लिए यह सही नहीं है। इसीलिए मेरा पहला निवेदन है कि हमें सबसे छोटे और अधिक महत्वपूर्ण विधेयकों उदाहरणार्थ नजरबंदी-निवारक विधेयक को समाप्त करवाना चाहिए। इस कानून के अधीन जिन लोगों को बंदी बनाया गया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर छोड़ दिया गया। उन लोगों को फिर से बंदी बना लिया गया है और अधिक बोध पूर्ण विधेयक की प्रत्याशा में, जिसका सरकार द्वारा वायदा किया गया था, सभी कुछ रुका पड़ा है। महोदय मेरा यह अनुरोध है कि कानून और व्यवस्था के हित में तथा इस तथ्य को देखते हुए कि बिना किसी बाधा के न्याय मिले, हमें सबसे महत्वपूर्ण विधेयक नजरबंदी निवारक (Preventive Detention Bill) का निपटारा सबसे पहले करना चाहिए, तत्पश्चात् (Employes Liability Bill) और उसके पश्चात् ही हिंदू संहिता विधेयक पर विचार किया जाना चाहिए और उस पर पूर्णरूप से अन्तिम विचार करना चाहिए। मैं आशा करता हूँ कि मेरा सुझाव माननीय विधि मंत्री को स्वीकार्य होगा।
माननीय अध्यक्ष : क्या इस सुझाव से माननीय मंत्री महोदय सहमत हैं?
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* संसदीय वाद-विवाद (तत्पश्चात् स. वा. वि. कहा गया है) खंड VIII भाग- II 5 फरवरी, 1951, पृष्ठ 2356-77