हिंदू संहिता : जारी खंड प्रति खंड चर्चा प्रवर समिति - Page 19

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अध्यक्ष : अतः, हम हिंदू संहिता विधेयक पर विचार शुरू करेंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल) : महोदय, मेरे विचार से हिंदू संहिता

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विधेयक सदन के सामने काफी समय से है। इसके बीच में कुछ महत्वपूर्ण बातें हो गई हैं जैसे कि संविधान बन गया तथा संविधान के बहुत सारे अधिनियम और धाराओं को विवाद पूर्ण घोषित कर दिया गया। प्रस्तुत विधेयक में भी लगता है कि संविधान के कुछ विशेष उपबंधों पर आपत्ति हो। हमने संविधान में बहुत से अधिनियम बनाए हैं। आश्चर्य होता है उनमें बहुत से संबद्ध अधिनियमों को विवादपूर्ण घोषित कर दिया गया है। संविधान में दो उपबंध हैं : प्रथम विधान भेदभाव पूर्ण नहीं होना चाहिए। इसका प्रावधान अनुच्छेद 15; खंड (1) में है। इसके अनुसार ‘‘राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, वंश, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा.........”

मेरे विचार से यह विधेयक हिंदुओं तक सीमित है। इसके ‘हिंदू’ की व्याख्या के अनुसार बहुत से वर्ग जो साधारण तथा हिंदू नहीं हैं, वो भी इसके अंतर्गत सम्मिलित करने की कोशिश की गई है। इसके अलावा बहुत सारे वर्ग इस विधेयक के बाहर ही रहेंगे। मेरे विचार के अनुसार इससे विभिन्न जातियों और विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों के साथ भेदभाव होगा। लगता है केवल धर्म शब्द से कोई अंतर नहीं पड़ता। धर्म के आधार पर हमारे नागरिकों के विभिन्न वर्गों में भेदभाव है। ‘‘केवल धर्म’’ का कोई विशेष अर्थ नहीं है। विभिन्न धार्मिक वर्गों में केवल धर्म के आधार पर क्यों मतभेद है मुझे इसका कोई कारण नजर नहीं आता है।

मैं सदन के समक्ष दूसरा अनुच्छेद विचारार्थ प्रस्तुत करना चाहूँगा जो इस प्रकार है.................

श्री त्यागी (उत्तर प्रदेश) : महोदय, मैं ध्यान दिला दूँ पिछली बार जब सदन स्थगित हुआ था। तब सर्वसम्मति से यह निर्णय हुआ था जिसमें वे भी समभागी थे- कि कोई भी दीर्घसूत्री प्रस्ताव नहीं रखा जाएगा।

माननीय अध्यक्ष : शांति! शांति! वे कोई प्रस्ताव नहीं रख रहे हैं। उनके अनुसार, वे तो केवल प्रस्ताव पर एक व्यवस्था का प्रश्न उठा रहे हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : श्रीमान, मैं बहुत संक्षेप में कहूँगा।

श्री बी. दास (उड़ीसा) : लेकिन वे तो एक लम्बा भाषण दे रहे हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं दूसरे अनुच्छेद 25(1) के बारे में कहना चाहूँगा। इसके अनुसार-