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के मूलभूत अभिगम के कारण। हम इस देश में राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त कर चुके हैं। वह यात्रा की एक मंजिल थी, और ऐसी ही अन्य आर्थिक, सामाजिक व अन्य मंजिलें हैं और यदि समाज को उन्नति करनी है तो सभी मोर्चों पर ऐसी संयुक्त उन्नति अवश्य ही होनी चाहिए।’’
26 सितम्बर, 1951 को प्रधान-मंत्री ने कहा थाः
‘‘इस मामले पर कार्यवाही करने की सरकार की इच्छा की सदन में पुष्टि करना मेरे लिए आवश्यक नहीं है, जहाँ तक संभव होगा, हम इस पर कार्यवाही कर सकते हैं और जहाँ तक हमारा संबंध है हम इस विषय को अगला अवसर मिलने तक स्थगित करते हैं - मैं आशा करता हूँ कि अगला अवसर इसी संसद में ही मिलेगा - स्वयं ही प्रस्तावित किया।’’
यह कथन प्रधानमंत्री की विधेयक को स्थगित करने की घोषणा करने के पश्चात् का था। प्रधानमंत्री के इन निर्णयों पर किसने विश्वास नहीं किया होगा? यदि मैंने ऐसा नहीं सेचा था कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में अंतर है तो यह निश्चित तौर पर मेरी गलती नहीं है। कैबिनेट से मेरा निष्कासन इस देश के किसी भी व्यक्ति के लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखता है। परन्तु मुझे स्वयं के प्रति निष्ठावान होना ही चाहिए जो कि मैं केवल निष्कासित होकर ही बन सकता हूँ। ऐसा करने से पूर्व मै अपने सहयोगियों का उनकी सहृदयता और शालीनता के लिए आभार प्रकट करना चाहता हूँ जो उन्होंने संसद में मेरे सदस्य बने रहने के दौरान दर्शायी थी। अभी मैं संसद की सदस्यता से त्यागपत्र नहीं दे रहा हूँ, मैं संसद के सदस्यों को भी मेरे प्रति अत्यधिक उदारता दर्शाने के लिए अपनी कृतज्ञता प्रकट करना चाहता हूँ।
नई दिल्ली
10 अक्तूबर, 1951 बी.आर. अम्बेडकर
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