वक्तव्य, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के त्याग-पत्र देने पर दिया गया स्पष्टीकरण - Page 611

596 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

द्वितीय स्थान पर यह था कि मैंने हिंदू अधिनियम के लिए पद पर बने रहना आवश्यक समझा था। कुछ लोगों के विचार से हिंदू अधिनियम के लिए पद पर बने रहना संभवतः अनुचित हो। मैंने इसे दूसरे दृष्टिकोण से लिया था। हिंदू अधिनियम इस देश में विधानमंडल द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा सामाजिक सुधार था। इसकी महत्ता की तुलना में भारतीय विधानमंडल द्वारा ऐसा कोई भी कानून पहले न तो पारित किया गया था और न ही भविष्य में कोई पारित किए जाने की संभावना है। वर्ण-भेद, लिंग-भेद जो हिंदू समाज की आत्मा है उसको छोड़ते हुए और आर्थिक समस्याओं से संबंधित कानून पारित करते जाना अपने संविधान का ही मजाक उड़ाना है और यह कूढ़े के ढेर पर महल बनाने जैसा है। इसी अभिप्राय को मैंने हिंदू संहिता के साथ जोड़ा है। यद्यपि मतभेद होते हुए भी मैं इसी के लिए पद पर बना रहा था। अतः यदि मैंने कुछ गलत कर दिया है तो वह भी कुछ अच्छा कर सकने की आशा से किया है। विरोधियों के प्रतिरोधवादी दांव-पेचों को परास्त करने के लिए, क्या मेरे पास ऐसी आशा का आधार था? इस संबंध में मैं, सदन के अंदर प्रधानमंत्री द्वारा कहे गए केवल तीन कथनों का ही संदर्भ ग्रहण करना चाहूँगा।

28 नवम्बर, 1949 को प्रधानमंत्री ने निम्नलिखित आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि-

‘‘इस मामले (हिंदू संहिता) के लिए सरकार वचन बद्ध हो रही है, इससे अधिक और क्या हो। इसके साथ ही यह चालू किया जा रहा है।’’

* * * * * * * *

‘‘सरकार उसके साथ ही कार्यवाई करेगी। यह इस सदन के द्वारा मामले को मान लेने के लिए हैं परन्तु यदि एक सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाती है और सदन उसे अस्वीकृत कर देता है और सदन सरकार को अस्वीकृत कर देता है सरकार चली जाती है तथा उसके स्थान पर दूसरी सरकार आ जाती है। यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि महत्वपूर्ण मामलों में से एक है जिस पर सरकार का महत्व देती है और जिस पर सरकार का सत्ता में रहना या गिर जाना निर्भर करता है।’’

पुनः 19 दिसम्बर, 1949 को, प्रधान-मंत्री ने कहा थाः

‘‘मैं सदन को थोड़ा-सा भी यह नहीं सोचने देना चाहता हूँ कि हम सोचते हैं कि ‘हिंदू संहिता विधेयक’ का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि हम इसे बहुत महत्व देते हैं और जैसा मैंने कहा था, कि इसको किसी विशिष्ट धारा अथवा अन्य किसी कारण से नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक समस्याओं में, इस विशाल समस्या