142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ऽदंत चिकित्सक (संशोधन) विधेयक
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः चूंकि माननीय स्वास्थ्य मंत्री अस्वस्थ हैं, अतः इस विधेयक की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गयी है। इसलिए मैं इस विधेयक को प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता हूँः
फ्कि दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 का संशोधन करने के इस विधेयक पर विचार किया जाएय्-
यह विधेयक बहुत छोटा है तथा इसमें किसी प्रकार के विवादास्पद मामले शामिल नहीं हैं। वर्ष 1948 का दंत चिकित्सक अधिनियम 29 मार्च, 1948 को लागू हुआ था। इसे भाग ‘क’, भाग ‘ग’ और भाग ‘घ’ राज्यों में लागू किया गया था। इस अधिनियम की धारा 49 के अधीन यह उपबंध है कि 28 मार्च, 1950 के बाद कोई भी व्यक्ति दंत चिकित्सा को व्यवसाय के तौर पर अपनाने का तब तक हकदार नहीं होगा जब तक कि इस अधिनियम के अनुसार उसका नाम दंत चिकित्सकों के रजिस्टर में दर्ज न हो और उस रजिस्टर को इस अधिनियम में दिए गए नियमों के अनुसार बनाया जाना चाहिए। आशा थी कि यह रजिस्टर 28 मार्च, 1950 तक तैयार हो जाएगा। परिणामस्वरूप इस अधिनियम का क्रियात्मक अंश इस प्रकार बनाया गया कि यह 28 मार्च, 1950 से लागू हो जाए। दुर्भाग्यवश, यह प्रत्याशा पूरी नहीं हुई। विभिन्न राज्यों से सूचना मिली कि यह रजिस्टर 28 मार्च, 1950 तक तैयार नहीं हो पाएगा और इसके परिणामस्वरूप इस अवधि को एक वर्ष और बढ़ाना आवश्यक हो गया ताकि संबंधित राज्य यह रजिस्टर तैयार कर सकें। चूंंक इस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा था, अतः सरकार ने अध्यादेश जारी किया जिसके माध्यम से आवश्यक उपबंध को प्रभावी बनाते हुए इस अवधि को 28 मार्च, 1951 तक बढ़ा दिया गया। यह विधेयक इस अध्यादेश को कानून में परिवर्तित करने के लिए लाया गया है। अतः मुख्य उपबंध यह है कि रजिस्टर बनाने के प्रयोजनार्थ इस समयावधि को बढ़ा दिया जाए।
मौजूदा अवसर का उपयोग इस कानून में संशोधन करने के लिए भी किया गया है ताकि उन कुछेक कठिनाइयों को दूर किया जा सके जो इस मूल अधिनियम को लागू करते समय सामने आई हैं। प्रथमतः, मूल अधिनियम में दो उपबंध थे। एक उपबंध यह था कि ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसका नाम इस रजिस्टर में दर्ज न हो, उसे सरकारी अस्पतालों में नौकरी करने की अनुमति न दी जाए। संभवतः यह आशा की गई थी कि यह उपबंध ऐसे रजिस्टरों के तैयार होने पर ही लागू होगा। चूंकि ये रजिस्टर तैयार नहीं
ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 11 अगस्त, 1950, पृष्ठ 841-843