17. दंत चिकित्सक (संशोधन) विधेयक - Page 166

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ऐसा था कि इसे मान्यता के प्रयोजनार्थ विचार किया जा सकता है। किन्तु उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि स्तर बनाए रखा गया किन्तु यह भी ज्ञात हुआ कि बहुत से लड़के कुछ सत्रों में उपस्थित हुए और कुछ शर्तें पूरी कीं परन्तु उन्होंने सीखा कुछ भी नहीं। अतः दो अतिरिक्त अर्हताएं आरंभ की गईं कि उसने 1940 से पहले न केवल डिप्लोमा प्रज्ञपत किया हो बल्कि उसने कॉलेज का छात्र होने के दौरान कछ सत्र भी पूरे किए हों। ऐसे प्रतिबंध लगाने के पीछे उद्देश्य यह था कि अर्हता वास्तविक और मान्यता योग्य हो। अपने स्वयं के निर्णय को प्रतिस्थापित करने के बजाय मैं व्यक्तिगत तौर पर स्वयं इस मामले को पश्चिम बंगाल सरकार के हाथ में सौंपने को तैयार हूँ जो इस मामले को बेहतर जानती है भले ही, मेरी पूरी सहानुभूति दंत चिकित्सकों के साथ है।

माननीय उपाध्यक्षः क्या माननीय सदस्य चाहते हैं कि उनका संशोधन सदन में रखूं?

पंडित ठाकुर दास भार्गवः जी हाँ, इसे सदन में रखा जाए।

माननीय उपाध्यक्षः संशोधन रखा गया।

ऽडॉ. अम्बेडकरः मैंने कुछ समय पहले आपको स्थिति स्पष्ट कर दी थी। धारा 10(2) में उपबंध है कि ‘जहां संस्थान अर्हता प्रदान करता है’µकिन्तु हम उन अर्हताओं पर विचार कर रहे हैं जो पहले ही प्रदान की जा चुकी हैं। वहाँ शब्द है ‘प्रदान करता है’ किन्तु यहां यह अलग है। अतः इस पर कानून के अनुसार कार्यवाही होनी चाहिए।

माननीय उपाध्यक्षः अब मैं इस संशोधन को मतदान के लिए रखूँगा।

प्रश्न है किः

फ्दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 की अनुसूची के भाग- I की प्रस्ताविक मद (2क) में, खंड 4 में, ‘मार्च, 1940’ के बाद आने वाले सभी शब्दों का लोप कर दिया जाए।य्

पंडित भार्गव का यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया।

माननीय उपाध्यक्षः प्रश्न हैः

ऽसं. वा., खंड 5, भाग II, 11 अगस्त, 1950, पृष्ठ 871