1. विदेशी मुद्रा विनियमन (संशोधन) विधेयक - Page 17

2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽविदेशी मुद्रा विनियमन (संशोधन) विधेयक

माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव पेश किया गया।

फ्विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 का संशोधन करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्

‘ब्रिटिश इंडिया’ अभिव्यक्ति संबंधी स्थिति के बारे में विधि सदस्य को क्या कहना है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः मेरा विचार है कि इसके उत्तर में मैं तब बोलूँ जब संशोधन पेश किया जाए। यदि आपकी ऐसी इच्छा है तो मैं स्थिति स्पष्ट करूँगा।

माननीय अध्यक्षः हाँ क्योंकि इससे समय की बचत होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन, हमारे पास वर्तमान विधि अनुकूलन आदेश नाम से एक आदेश है जिसमें पद को परिभाषित किया गया है। उस आदेश में ‘ब्रिटिश इंडिया’ पद परिभाषित है और उसे ‘ब्रिटिश इंडिया के सभी प्रांतों’ के अर्थ में परिभाषित किया गया है। अतः सदन, इस विशिष्ट विधेयक में इन दोनों में से कोई भी पद सम्मिलित करने के लिए स्वतंत्र है अनुकूलन आदेश के अधीन जिसका वही अर्थ है। हम या तो फ्ब्रिटिश इंडियाय् का प्रयोग कर सकते हैं या फ्भारत के सभी प्रांतोंय् का, जिन का अर्थ एक-ही है। इन दो अनुकल्पों का और इनमें से हमें किसे अपनाना चाहिए, यह प्रश्न वास्तव में उस पदावली द्वारा अवधारित किया जाना चाहिए जिसका प्रयोग मुख्य विधेयक में किया गया है। यह विधेयक जिसके अनुसार मात्र एक संशोधन है। विदेशी मुद्रा विनियमन से संबंधित मूल विधेयक में प्रयुक्त पद ‘ब्रिटिश इंडिया’ है और मेरा यह निवेदन है कि यदि इस संशोधन को बोधगम्य बनाना है तो इसमें सामान्य पदावली का प्रयोग किया जाना चाहिए जो कि ‘ब्रिटिश इंडिया’ है। उसी पदावली का प्रयोग करके कोई हानि नहीं होगी बल्कि फायदा ही होगा। पटल पर रखा गया संशोधन, मेरी राय में, शुद्ध रूप से भावुकतापूर्ण है और विधि के पाठ से फ्ब्रिटिशय् शब्द को हटाने की कामना व्यक्त है।

श्री के. संतानम (मद्रासः साधारण)ः बिल्कुल नहीं।

ऽसंविधान सभा (विधायी) वाद-विवाद जिसे इसमें इसके पश्चात् सं. स. (वि.) वा. कहा गया है,

खंड 1, 20 नवंबर, 1947, पृष्ठ 357