202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः जो सरकारी नहीं है। बस और कुछ नहीं।
ऽश्री त्यागीः ..........जिनके पास कोई कार्यालय या पद नहीं होता है, वे गैर-सरकारी होते हैं जैसे कि मैं। महोदय, लेकिन श्री जवाहर लाल नेहरू एवं डॉ. अम्बेडकर जैसे लोग जिनके पास पद हैं, वे गैर-सरकारी नहीं हो सकते। चूंकि मेरे पास कोई पद नहीं है अतः मैं गैर-पदीय हूँ। अतः मेरा अनुरोध है कि फ्गैर-पदीयय् शब्द की स्पष्ट परिभाषा दी जाए, यदि किसी अन्य अधिनियम में नहीं दी गई है, अन्यथा इससे परेशानियां पैदा होंगी।
डॉ. अम्बेडकरः फ्गैर-सरकारीय् शब्द इतना मूलभूत (सरल) है कि मैंने सोचा कि इसके लिए और कोई सरल शब्द ढूंढना बहुत ही कठिन होगा और मैं अपने मित्र श्री त्यागी को सुझाव देना चाहूँगा कि यदि वे इस शब्द को लेकर कभी किसी कानूनी विवाद में फँस गए और उन्होंने किसी घटिया से घटिया वकील को किया तो भी वह उन्हें पर्याप्त सलाह दे देगा।
ऽऽश्री देशबन्धु गुप्ताः मैं केवल यह बताना चाहता हूँ कि सलाहकार परिषद का कोई गैर-सरकारी सदस्य नहीं है। यहां (ख) में मुख्य आयुक्त आदि की सलाहकार परिषद के गैर-सरकारी सदस्यों का उल्लेख किया गया है। वहाँ कोई गैर-सरकारी नहीं है। अतः यदि यह आवश्यक न हो तो फ्गैर-सरकारीय् शब्द हटा दिया जाए। मैं यह सुझाव करके प्रस्तावक को दे रहा हूँ।
डॉ. अम्बेडकरः इससे कोई नुकसान नहीं होगा।
श्री एम.ए. अय्यंगरः ..............इसके बाद धारा 134 के अंतर्गत नियम बनाए गए। जब भारत शासन अधिनियम का खंडन किया गया। तब एक अध्यादेश जारी किया गया जिसमें यह परिभाषित किया गया था कि फ्सरकारीय् कौन है और फ्गैर-सरकारीय् कौन है। यह अध्यादेश समाप्त हो गया और बाद में अध्यादेश के अंतर्गत भी इनको परिभाषित किया जाना आवश्यक समझा गया था, तब हमें इसे अब क्यों नहीं परिभाषित करना चाहिए? इस कमी को हटाया जाना चाहिए। यह इतना सरल शब्द नहीं है कि शब्दकोश में मिल जाए। यह इसकी व्याख्या पर निर्भर करेगा। यह बहुत ही विधिमान्य आपत्ति है।
डॉ. अम्बेडकरः मुझे विश्वास है कि यह विषय इसमें आ गया है। यदि नहीं आया है तो उसे इसमें लगाना कठिन नहीं है।
ऽसं. वा., खंड 7, भाग II, 22 दिसंबर, 1950, पृष्ठ 2264-65
ऽऽसं. वा., खंड 7, भाग II, 22 दिसंबर, 1950, पृष्ठ 2269