25. मांग सं. 13 - विधि मंत्रालय - Page 227

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽमाँग सं. 13µविधि मंत्रालय

माननीय उपाध्यक्षः प्रस्ताव हैः

फ्कि अनुपूरक राशि, जो रुपये 15,93,000 से ज्यादा न हो, राष्ट्रपति को दे दी जाए ताकि वे उन प्रभारों को चुका सकें जो ‘विधि मंत्रालय’ के संबंध में 31 मार्च, 1951 को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान भुगतान के समय सामने आएंगे।य्

श्री कामथः इस अनुपूरक माँग के बारे में, पिछले सत्र में इसकी चर्चा के मध्य में, संसद सत्र समाप्त हो गया और डॉ. अम्बेडकर को उस समय सदन के समक्ष रखी गई इस विशेष माँग के संबंध में उत्तर देना था। पाद टिप्पण (फुटनोट) में कहा गया है कि यह अधिकता इसलिए है कि बजट सत्र के बाद विधि मंत्रालय के अन्तर्गत एक केन्द्रीय अभिकरण बनाया गया है ताकि केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों की ओर से मामलों को उच्चतम न्यायालय में ले जाया जा सके। इस व्यय में भारत सरकार तथा भागीदार राज्यों की सरकारों की हिस्सेदारी होगी। डॉ. अम्बेडकर को याद होगा कि उन्हें उस समय उठाए गए इस विशेष प्रश्न का उत्तर देना था लेकिन संसद उस दिन के लिए उठ गई थी और इस प्रकार यह माँग सदन के समक्ष नहीं रखी जा सकी। मैं आभारी रहूँगा यदि डॉ. अम्बेडकर बजट पारित होने के बाद बनाए गए इस अभिकरण के बारे में कुछ जानकारी दें, विशेषकर इस मामले में कि अन्य सरकारों से वसूली कैसे की जाएगी। कितनी राज्य सरकारें इस अभिकरण को अंशदान दे रही हैं और उनका अनुपात क्या है, और इस बनाए गए केन्द्रीय अभिकरण द्वारा इस वस्तुतः क्या-क्या कार्य किए जाने हैं?

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः उपाध्यक्ष महोदय, मुझे विश्वास है वस्तुतः मैं आश्वस्त हूँµकि इस सत्र के दौरान मेरे सामने दो प्रश्न रखे गए थे, एक प्रश्न श्री राज बहादुर द्वारा रखा गया था और दूसरा श्री काज़मी द्वारा और इन दो प्रश्नों के उत्तर के समय मैंने इस बिन्दु पर पूरी जानकारी दे दी है। यदि मेरे माननीय मित्र मेरे उत्तरों को देखने का कष्ट करें तो उन्हें वह सारी जानकारी मिल जाएगी जो उन्हें चाहिए।

श्री हुसैन इमामः क्या वे लिखित उत्तर थे या मौखिक?

डॉ. अम्बेडकरः वे मौखिक उत्तर थे परन्तु वे कार्यवाही के रिर्कार्ड में मिल जाएंगे। यदि आवश्यक हुआ तो मैं उन्हें अपनी प्रति दे दूँगा।

माननीय उपाध्यक्षः यह कार्यवाही में दिया हुआ है।

ऽसं. वा., खंड 7, भाग II, 21 दिसंबर, 1950, पृष्ठ 2178-79