272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रखते हो तो फ्आदेशय् शब्द को अवश्य रखा जाए क्योंकि दंड न्यायालयों में ये आदेश कानून के समान होते हैं। मेरा तात्पर्य साधारण आदेशों से नहीं है बल्कि सूती धागा एवं कपड़ा नियंत्रण आदेश, चीनी नियंत्रण आदेश एवं ऐसे अनेक आदेश जो कानून के समान हैं। कभी-कभी इन्हें न्यायालयों में चुनौती दी जाती है कि क्या ये आदेश वैध हैं अथवा नहीं। सिर्फ ‘अधिनियम’ शब्द पहले रखने से काम नहीं चलेगा।
मेरा दूसरा संशोधन हैं कि प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट संहिता की धारा 432 के उप-खंड (2) में यदि फ्सेशन न्यायाधीशय् शब्द जोड़े जाते हैं तो इससे सेशन न्यायाधीशों को बड़ा कार्यक्षेत्र मिलेगाय् और मामले को उच्च न्यायालय में भेजने के लिए भी। यदि मंत्री महोदय इन संशोधनों को स्वीकार करते हैं तो मैं उन्हें रखूंगा अन्यथा नहीं।
डॉ. अम्बेडकरः फ्अथवा आदेशय् शब्दों को प्रस्तावित करने वाले खंड 3 के पहले संशोधन के संबंध में स्थिति यह है कि आदेश वस्तुतः विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून के अधीन जारी किया जाता है। यदि किसी पक्षकार की दलील है कि जिस कानून के अधीन आदेश जारी किया गया है वह अधिकारातीत है तो मामला न्यायाधीश द्वारा उच्च न्यायालय को भेजा जाएगा, यदि वह उस दलील से संतुष्ट है। यदि पार्टी की दलील है कि उक्त कानून वैध है लेकिन आदेश नहीं तो इस विधेयक का विमर्शित आशय यह है कि ऐसा मामला अधीनस्थ न्यायाधीश अथवा मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित किया जाना चाहिए क्योंकि हमारा प्रस्ताव इस प्रकार के मुकदमों के उच्च न्यायालय पर कार्य का अधिक बोझ डालने का नहीं है जो अधीनस्थ न्यायालय द्वारा आसानी से निर्धारित किए जा सकते हैं और इससे सार्वजनिक व्यापकता प्रभावित नहीं होती है बल्कि उस विधान से व्यक्ति विशेष प्रभावित होता है।
जहां तक प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायाधीशों को विशेषाधिकार अथवा अवसर प्रदान करने विषयक आखिरी संशोधन का संबंध है, उदाहरणार्थ यदि वह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436, 437 एवं 438 का उल्लेख करेगा तो मजिस्ट्रेट एवं सेशन न्यायाधीश दोनों को त्रुटि ठीक करने तथा उच्च न्यायालीय में त्रुटि ठीक करवाने विषयक सभी मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त अधिकार प्राप्त है। ऐसे पर्याप्त उपबंध पहले से हैं।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न है।
फ्कि यथा संशोधित खण्ड 3 इस विधेयक का भाग बन गया है।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
यथा संशोधित खण्ड 3 को विधेयक में जोड़ा गया।