274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ऽसिविल प्रक्रिया संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः
फ्कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का और आगे संशोधन करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
यह बहुत ही सरल उपाय है। माननीय सदस्यों को याद होगा कि भारत विभाजन के बाद भारतीय न्यायालयों द्वारा कार्यवाही करने और पाकिस्तान में रहने वाले व्यक्तियों को सम्मन देने और पाकिस्तानी न्यायालयों द्वारा जारी सम्मन भारत में रहने वाले व्यक्तियों को सम्मन देने में अनेक कठिनाइयां आई हैं।
(पंडित ठाकुर दास भार्गव पीठासीन)
अब यह दो देशों का मामला है और इस मामले पर अभी कोई संधि नहीं हुई है। परिणामतः सभी सम्मन डाकघर भेजे जाते हैं जो संचार का विश्वसनीय तरीका नहीं कहा जा सकता। हाल में भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ है जिसमें दोनों देश पारस्परिक आधार पर सहमत हुए हैं कि एक देश से जारी किए गए सम्मन दूसरे देश के न्यायालयों में भेजे जाएं और वे वहां रहने वाली पार्टी को उस सम्मन को देंगे अथवा कार्यवाही करेंगे। इस विधेयक का उद्देश्य इस समझौते को लागू करना है। मैं कह सकता हूं कि पाकिस्तान पहले से ही इस समझौते को लागू कर चुका है और वहां ऐसा कानून मौजूद है। मुझे आशा है कि यह सदन इस विधेयक को स्वीकार करेगा।
माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव पेश किया गयाµ
फ्कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का और आगे संशोधन करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
श्री सिधवा (मध्य प्रदेश)ः यह स्वागत योग्य उपाय है। अनेक निर्वासित व्यक्ति, जो यहां आए हैं और जिन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले व्यक्तियों पर दावे किए हैं। वे मुकदमों की डिक्री राशि को वसूल न कर पाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता हुआ है और पाकिस्तान ने भी इस तरह का कानून बनाया है। दूसरी ओर सम्मन देने के प्रश्न को सुलझा लिया गया है। मैं मंत्री से जानना चाहता हूं कि पाकिस्तान में रह रहे किसी व्यक्ति के विरुद्ध यहां स्वीकृत निर्णय के संबंध में क्या कोई ऐसा समझौता हुआ है कि वे इस निर्णय
ऽसं. वा., खंड 11, भाग II, 20 अप्रैल, 1951, पृष्ठ 7176-78