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को कार्यान्वित कर वसूल की गई राशि को भारत में रह रहे वादी को भिजवा देंगे। यही मुख्य बिन्दु इस प्रश्न से जुड़ा है। सिर्फ सम्मन देने से यह कार्य पूरा नहीं होगा। प्रतिवादी तटस्थ हो सकता है और एक पक्षीय निर्णय प्राप्त किया जा सकता है। आदेश को कार्यान्वित करने के लिए जब तक कोई कानून नहीं है प्रतिवादी वकील करने के लिए पैसे क्यों खर्च करे। इस संबंध में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। मैं चाहूंगा कि मंत्री हमें जानकारी दे कि पाकिस्तान से चर्चा करते समय इस प्रश्न पर विचार किया गया है या नहीं, भारत में न्यायालय के निर्णय का क्या प्रभाव होगा, पाकिस्तान में प्रतिवादी के विरुद्ध कौन आदेश पारित कर सकता है? इसके उपबंध के बिना इस विधेयक का कोई अर्थ नहीं होगा।
डॉ. अम्बेडकरः राष्ट्रों में सौहार्द के रूप में प्रत्येक देश अन्य देशों के न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्णय को निष्पादित करने के लिए सहमत है। निस्संदेह भिन्न-भिन्न देशों के अलग-अलग नियम प्रक्रिया हैं परन्तु निर्णयों को लागू करने के संबंध में कोई कठिनाई नहीं है। निर्णय को सत्य सिद्ध करने के लिए कुछ सबूतों की आवश्यकता होती है। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 इसे विनियमित करती है।
श्री नजरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल)ः कोई विदेशी निर्णय किसी भी देश में बिल्कुल कार्यान्वित नहीं कया जा सकता। सिविल प्रक्रिया संहिता इसके लिए कोई उपबंध नहीं करती। विदेशी निर्णय मुकदते का अधिकार प्रदान करता है और नया मुकदमा दायर किया जाता है और नया निर्णय प्राप्त करना होता है।
डॉ. अम्बेडकरः यह केवल प्रक्रिया की बात है।
श्री नजरुद्दीन अहमदः पूरे मामले को पुनः लड़ा जाता है। मैं यह मुद्दा उठा रहा हूं कि एक विदेशी डिक्री को निष्पादित नहीं किया जा सकता।
श्री सिधवाः मुझे आपका मार्गदर्शन चाहिए। मुझे याद है कि इंग्लैंड के एक प्रतिवादी के विरुद्ध भारत में मुकदमा दायर किया गया था। निर्णय यहां लिया गया था परन्तु उसे निष्पादित नहीं किया जा सका। लन्दन में एक नया मुकदमा दायर किया गया। मैं हैरान हूं कि बिना ऐसे समझौते के निर्णय को कोई महत्व नहीं होगा।
डॉ. अम्बेडकरः सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 ऐसे मामले के बारे में है। विदेशी डिक्री को लागू होने का प्रश्न ही नहीं है। प्रश्न यह है कि प्रत्येक देश क्या प्रक्रिया अपनाता है।
श्री सिधवाः इसका कोई अर्थ नहीं है।
डॉ. अम्बेडकरः किसका कोई अर्थ नहीं है? दंड के मामले में सिर्फ ऐसा कहा जा सकता है कि तुम्हें एक नया आवेदन प्रस्तुत करना पड़ेगा केवल तभी यह लागू हो